फ्रांस की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम को नया मुख्य कोच मिल गया है। दिग्गज फुटबॉलर जिनेदिन जिदान को टीम की कमान सौंपी गई है। उनकी नियुक्ति के बाद टीम के कप्तान कीलियन एम्बाप्पे ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर "Bienvenue chez toi" (वेलकम होम) लिखकर उनका स्वागत किया। एम्बाप्पे का यह संदेश फ्रांस फुटबॉल के नए दौर की शुरुआत का संकेत माना जा रहा है।
बचपन के आदर्श अब बने कोच
एम्बाप्पे कई बार कह चुके हैं कि जिदान उनके बचपन के सबसे बड़े आदर्श रहे हैं। पेरिस के बॉन्डी में बड़े होते हुए उन्होंने जिदान को देखकर फुटबॉल खेलना सीखा। किशोरावस्था में जब एम्बाप्पे पहली बार रियल मैड्रिड के ट्रेनिंग सेंटर पहुंचे थे, तब जिदान से उनकी मुलाकात हुई थी। अब दोनों पहली बार फ्रांस की राष्ट्रीय टीम में कोच और कप्तान के रूप में साथ काम करेंगे।
कप्तान बने रहेंगे एम्बाप्पे
रिपोर्ट के मुताबिक जिदान के कार्यकाल में भी कीलियन एम्बाप्पे ही फ्रांस टीम के कप्तान बने रहेंगे। हालांकि अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिदान ने कप्तानी पर अंतिम फैसला घोषित नहीं किया। उन्होंने कहा कि लंबे क्लब सीजन और विश्व कप के बाद खिलाड़ियों को आराम की जरूरत है और सितंबर में टीम के दोबारा जुटने पर सभी से चर्चा की जाएगी।
शानदार फॉर्म में हैं एम्बाप्पे
27 वर्षीय एम्बाप्पे फ्रांस के लिए अब तक 66 गोल कर चुके हैं और देश के सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी बन चुके हैं। 2026 फीफा विश्व कप में उन्होंने 10 गोल दागकर टूर्नामेंट के टॉप स्कोरर का सम्मान हासिल किया। हालांकि उनके शानदार प्रदर्शन के बावजूद फ्रांस खिताब नहीं जीत सका और टीम चौथे स्थान पर रही।
डेशां के बाद जिदान पर बड़ी जिम्मेदारी
जिदान ने फ्रांस के सबसे सफल कोचों में शामिल डिडिएर डेशां की जगह ली है। डेशां के नेतृत्व में फ्रांस ने 2018 फीफा विश्व कप और 2021 यूईएफए नेशंस लीग का खिताब जीता था। वहीं यूरो 2016 और 2022 विश्व कप के फाइनल तक भी टीम पहुंची थी। अब फ्रांस फुटबॉल को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की जिम्मेदारी जिदान के कंधों पर होगी।
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25 सितंबर से शुरू होगा नया अध्याय
जिदान के कार्यकाल का पहला मुकाबला 25 सितंबर को तुर्किये के खिलाफ यूईएफए नेशंस लीग में खेला जाएगा। इस मैच के साथ जिदान के कोचिंग करियर का नया अध्याय और एम्बाप्पे-जिदान की बहुप्रतीक्षित साझेदारी भी आधिकारिक रूप से शुरू होगी। अब फुटबॉल प्रशंसकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या यह जोड़ी फ्रांस को फिर से विश्व फुटबॉल की बुलंदियों तक पहुंचा पाती है।