Nagaur MDMA Case : राजस्थान के नागौर में एक 28 साल के युवक की कहानी इन दिनों चर्चा में है. पुलिस के मुताबिक महावीर नाम का युवक नौकरी करता था, लेकिन उसे अपनी कमाई कम लगती थी. वह कम समय में ज्यादा पैसा कमाना चाहता था. इसी सोच ने उसे ऐसा रास्ता चुनने के लिए प्रेरित किया, जिसने अब उसे कानून के घेरे में ला खड़ा किया है. पुलिस का दावा है कि महावीर ने नौकरी छोड़ने के बाद कथित तौर पर एमडीएमए बनाने का अवैध काम शुरू कर दिया.
किराए का मकान बना जांच का केंद्र
पुलिस के अनुसार महावीर नागौर की दीप कॉलोनी में किराए के मकान में रह रहा था. जांच में सामने आया कि दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के दौरान उसने एमडीएमए तैयार करने की कोशिश शुरू की थी. शुरुआती प्रयास सफल नहीं हुए, लेकिन बाद में उसने कथित तौर पर ऑनलाइन माध्यमों से जानकारी जुटाई और पूरा सेटअप तैयार कर लिया. फरवरी 2026 में नौकरी छोड़ने के बाद उसने किराए के मकान का इस्तेमाल इसी काम के लिए करना शुरू कर दिया.
पुलिस रेड में चौंकाने वाले दावे
10 अगस्त 2026 को पुलिस को सूचना मिली, जिसके बाद दीप कॉलोनी में कार्रवाई की गई. पुलिस का कहना है कि वहां से बड़ी मात्रा में संदिग्ध सामग्री और उपकरण बरामद किए गए. अधिकारियों के मुताबिक शुरुआती कार्रवाई में करीब 20 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की सामग्री मिलने का दावा किया गया. पूछताछ के दौरान आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई.
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दूसरी जगह से मिला बड़ा जखीरा
पुलिस की जांच आरोपी को जोधपुर रोड स्थित एक अन्य मकान तक ले गई. यहां की गई कार्रवाई में पुलिस ने 5.418 किलो एमडीएमए, करीब 2.744 किलो कैफीन, 24 तरह के केमिकल और लगभग 210 लीटर रासायनिक पदार्थ बरामद करने का दावा किया है. पुलिस के अनुसार बरामद सामग्री की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 100 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई है. इस खुलासे के बाद मामला और बड़ा हो गया.
कई उपकरण और बदलते सिम कार्ड
पुलिस को मौके से मिक्सिंग मशीन, थर्मामीटर, मैग्नेटिक स्टेयरर, पीएच मीटर, ग्लास बीकर, कांच के जार और अन्य उपकरण भी मिले हैं. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर बार-बार मोबाइल सिम बदलता था. पुलिस के मुताबिक उसके पास 10 से 12 सिम कार्ड होने की जानकारी मिली है और वह लगभग हर 10 दिन में नया सिम इस्तेमाल करता था. अब कॉल रिकॉर्ड और संपर्कों की जांच की जा रही है.
नेटवर्क की तलाश में जांच एजेंसियां
पुलिस का कहना है कि मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता. जांच में उसके चार सहयोगियों की भूमिका भी सामने आई है. अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए रसायन कहां से आए, तैयार सामग्री कहां भेजी जाती थी और इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे. पुलिस ने इसे ‘ऑपरेशन नशा मुक्त नागौर’ के तहत बड़ी कार्रवाई बताया है. फिलहाल जांच जारी है और पूरे नेटवर्क की परतें खोलने की कोशिश की जा रही है.