अगर आपके घर में बिजली की खपत ज्यादा है, तो 10kW का एक सोलर सिस्टम अधिक फायदेमंद माना जाता है। इसमें इंस्टॉलेशन का खर्च कम आता है, रखरखाव आसान रहता है और बड़े बिजली लोड को संभालने की क्षमता भी बेहतर होती है। वहीं, 5kW के दो अलग-अलग सिस्टम लगाने पर कई अतिरिक्त खर्च बढ़ सकते हैं।
दो 5kW सिस्टम में बढ़ सकता है खर्च
अगर आप दो अलग-अलग 5kW सिस्टम लगवाते हैं, तो कई मामलों में दो इन्वर्टर, अलग वायरिंग और अलग इंस्टॉलेशन की जरूरत पड़ सकती है। इससे शुरुआती लागत बढ़ सकती है। इसके मुकाबले 10kW का एक सिस्टम लगाने पर यह खर्च एक बार ही करना पड़ता है, जिससे कुल लागत कम हो सकती है।
ज्यादा बिजली इस्तेमाल करने वालों के लिए कौन बेहतर?
अगर आपके घर में 3-4 एसी, पानी की मोटर और अन्य हाई-पावर उपकरण एक साथ चलते हैं, तो 10kW का सिंगल सिस्टम ज्यादा उपयुक्त माना जाता है। यह अधिक लोड को बेहतर तरीके से संभाल सकता है। वहीं, 5kW का सिस्टम ज्यादा लोड पड़ने पर सीमित क्षमता के कारण उतना प्रभावी नहीं रह सकता।
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रखरखाव में भी है अंतर
10kW के एक सिस्टम में उपकरण कम होने के कारण सर्विसिंग और मेंटेनेंस अपेक्षाकृत आसान और कम खर्चीला हो सकता है। दूसरी ओर, दो अलग-अलग सिस्टम होने पर दोनों की देखभाल अलग-अलग करनी पड़ती है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ सकते हैं।
फैसला लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर आपके घर की बिजली खपत ज्यादा है और छत पर पर्याप्त जगह उपलब्ध है, तो 10kW का सिस्टम बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं, अगर आपका बजट सीमित है, तो पहले 5kW का सिस्टम लगवाकर बाद में जरूरत के अनुसार क्षमता बढ़ाने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है।
जरूरत और बजट के हिसाब से करें चुनाव
सोलर सिस्टम चुनते समय सिर्फ कीमत नहीं, बल्कि बिजली की जरूरत, छत की उपलब्ध जगह और भविष्य की खपत को भी ध्यान में रखना चाहिए। सही योजना के साथ लगाया गया सोलर सिस्टम लंबे समय तक बिजली बिल कम करने में मदद कर सकता है।