Airport Privatization PPP Model : सरकार देश के 11 एयरपोर्ट्स को पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी में है। इस सूची में वाराणसी, गया, कुशीनगर, अमृतसर और भुवनेश्वर जैसे महत्वपूर्ण हवाई अड्डे शामिल हैं। खास बात यह है कि इस बार सरकार ने 2019 के अनुभव से सबक लेते हुए ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिससे किसी एक कंपनी का दबदबा न बन सके।
PPP मॉडल को मिली सैद्धांतिक मंजूरी
पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप अप्रेजल कमिटी (PPPAC) ने 4 अगस्त को हुई बैठक में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। योजना के तहत इन एयरपोर्ट्स को 50 साल की लीज पर निजी कंपनियों को दिया जाएगा। सरकार का अनुमान है कि इन हवाई अड्डों के विकास और विस्तार के लिए करीब 8,622 करोड़ रुपये का निवेश होगा।
पांच बड़े और छह छोटे एयरपोर्ट का बनेगा बंडल
सरकार ने इस बार एयरपोर्ट्स को अलग-अलग नहीं बल्कि बंडल के रूप में देने का फैसला किया है। पांच बड़े एयरपोर्ट्स को छह छोटे एयरपोर्ट्स के साथ जोड़कर कुल पांच बंडल बनाए जाएंगे। प्रत्येक बंडल एक ही ऑपरेटर को दिया जाएगा। इसका उद्देश्य छोटे एयरपोर्ट्स के विकास को भी सुनिश्चित करना और प्रतिस्पर्धा बनाए रखना है।
वाराणसी-गया बंडल पर होगा बड़ा निवेश
रिपोर्ट के मुताबिक भुवनेश्वर-हुबली बंडल में सबसे अधिक 2,725 करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी। इसके बाद वाराणसी-गया-कुशीनगर बंडल में 2,467 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। वहीं रायपुर-औरंगाबाद बंडल में 1,496 करोड़ रुपये, तिरुचिरापल्ली-तिरुपति में 1,411 करोड़ रुपये और अमृतसर-कांगड़ा बंडल में 523 करोड़ रुपये निवेश किए जाएंगे।
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तीन साल में पूरा करना होगा विकास कार्य
निजी कंपनियों को एयरपोर्ट्स के विस्तार और क्षमता बढ़ाने से जुड़े स्वीकृत पूंजीगत खर्च का काम कमर्शियल ऑपरेशन शुरू होने के तीन साल के भीतर पूरा करना होगा। इसमें पहले से स्वीकृत परियोजनाएं और भविष्य की जरूरतों के अनुसार अतिरिक्त विकास कार्य भी शामिल होंगे।
2019 जैसी स्थिति दोबारा नहीं चाहती सरकार
सरकार इस बार एयरपोर्ट आवंटन में एकाधिकार की संभावना को कम करना चाहती है। 2019 में निजीकरण के दौरान अडानी समूह ने सभी छह एयरपोर्ट्स की बोली जीत ली थी। इसी अनुभव को देखते हुए अब एक ही कंपनी को मिलने वाले एयरपोर्ट बंडलों की संख्या सीमित करने की तैयारी की जा रही है।
एक कंपनी को नहीं मिलेंगे सभी एयरपोर्ट
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार एक ही बोलीदाता को कितने बंडल दिए जा सकते हैं, इसकी सीमा तय करने पर काम चल रहा है। इसका उद्देश्य बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखना, एकाधिकार को रोकना और कंपनियों पर अत्यधिक कर्ज के जोखिम को कम करना है। माना जा रहा है कि अंतिम बोली प्रक्रिया में इसी व्यवस्था को लागू किया जाएगा।
एयरपोर्ट सेक्टर में बढ़ेगा निजी निवेश
विशेषज्ञों का मानना है कि PPP मॉडल के जरिए निजी निवेश आने से एयरपोर्ट्स के बुनियादी ढांचे, यात्री सुविधाओं और परिचालन क्षमता में सुधार होगा। साथ ही छोटे और कम व्यस्त एयरपोर्ट्स को भी बड़े एयरपोर्ट्स के साथ जोड़कर विकसित करने की रणनीति क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती दे सकती है।