
Blackout in Balochistan: पाकिस्तान सरकार ने बलूचिस्तान प्रांत में 31 अगस्त तक 23 दिनों के लिए इंटरनेट बंद करने का फैसला लिया है। सरकार का कहना है कि यह कदम सुरक्षा कारणों से उठाया गया है, लेकिन स्थानीय लोगों और मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि यह केवल दमन को छुपाने की कोशिश है। इंटरनेट शटडाउन के पीछे सेना का कोई बड़ा ऑपरेशन होने की आशंका जताई जा रही है। इससे पहले भी खैबर पख्तूनख्वा में ऐसा किया गया था, जहां एक सीक्रेट सैन्य अभियान के दौरान कई आम नागरिक मारे गए थे।
बलूच विद्रोहियों का दावा – सीधी लड़ाई की शुरुआत
बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान के लिए एक संवेदनशील और हिंसाग्रस्त इलाका रहा है। यहां सक्रिय बलूच लिबरेशन आर्मी और बलूच लिबरेशन फोर्स जैसे संगठनों के करीब 5,000 से ज्यादा लड़ाके सेना को लगातार चुनौती दे रहे हैं। 2025 के शुरुआती 6 महीनों में 286 हमलों में 700 से ज्यादा लोग मारे गए। वरिष्ठ पत्रकार मीर यार बलूच के मुताबिक, अब लड़ाके उन जगहों पर हमला कर रहे हैं जिन्हें ‘सुरक्षित ज़ोन’ माना जाता था—जैसे रेलवे ट्रैक और प्रशासनिक ठिकाने। यह संकेत है कि सेना और बलूच विद्रोहियों के बीच सीधी जंग की शुरुआत हो चुकी है।
इंटरनेट बंद कर विरोध की आवाज़ दबाने की कोशिश?
सामाजिक कार्यकर्ता साहिर बलूच का कहना है कि पाकिस्तान सरकार इंटरनेट को बंद करके अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपनी कार्रवाई छुपाना चाहती है। पहले लोग जबरन गुमशुदगी और सैन्य ज्यादती के खिलाफ वीडियो बनाकर विरोध जताते थे, लेकिन अब उनके पास वो माध्यम भी नहीं है। बलूच समर्थकों का आरोप है कि यह सिर्फ इंटरनेट शटडाउन नहीं, अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सीधा हमला है। ऐसे में सवाल यही है—क्या बलूचिस्तान में कोई बड़ा सैन्य अभियान होने जा रहा है, जिसकी भनक भी दुनिया को नहीं लगने दी जा रही?