Cashless Claim Dispute : हेल्थ इंश्योरेंस को लोग मुश्किल समय में आर्थिक सहारा मानते हैं। लेकिन एक हालिया मामले ने कई पॉलिसीधारकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक दावे के अनुसार, एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी के इलाज के लिए हेल्थ इंश्योरेंस का सहारा लेना चाहा, लेकिन कैशलेस क्लेम मंजूर नहीं हुआ। इसके बाद मामला चर्चा का विषय बन गया।
8 साल से भर रहे थे प्रीमियम
सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी के मुताबिक, संबंधित व्यक्ति पिछले करीब 8 साल से नियमित रूप से हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम भर रहा है। उसके पास परिवार के अलग-अलग सदस्यों के लिए कई हेल्थ पॉलिसियां हैं। दावा किया गया कि इस दौरान उसने कभी कोई क्लेम नहीं किया था और पहली बार जरूरत पड़ने पर कैशलेस सुविधा के लिए आवेदन किया गया।
पत्नी के इलाज के दौरान भेजा गया क्लेम
जानकारी के अनुसार, व्यक्ति की पत्नी ग्रेटर नोएडा के एक निजी अस्पताल में भर्ती थीं। इलाज के लिए कैशलेस क्लेम की मांग की गई। सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया गया कि क्लेम रिक्वेस्ट भेजे जाने के कुछ ही मिनटों के भीतर उसे मंजूरी नहीं दी गई। इसके बाद स्पष्टीकरण भेजने पर भी वही जवाब मिलने की बात कही गई।
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कंपनी ने क्या कहा?
साझा किए गए दस्तावेजों के अनुसार, बीमा कंपनी ने कहा कि उपलब्ध मेडिकल दस्तावेजों के आधार पर मरीज को मुख्य रूप से जांच और मूल्यांकन के लिए भर्ती किया गया था। इसी वजह से संबंधित अनुरोध पर कैशलेस सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। कंपनी ने पॉलिसी की शर्तों का हवाला देते हुए अपना निर्णय बताया।
क्या क्लेम पूरी तरह खारिज हुआ?
बीमा कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि कैशलेस सुविधा न मिलने का मतलब यह नहीं है कि पूरा क्लेम अस्वीकार कर दिया गया है। कंपनी के मुताबिक, पॉलिसीधारक इलाज का खर्च पहले वहन कर सकता है और बाद में रीइम्बर्समेंट क्लेम के जरिए राशि वापस पाने के लिए आवश्यक दस्तावेज जमा कर सकता है।
क्यों चर्चा में है मामला?
यह मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि सोशल मीडिया पर कई लोग हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की क्लेम प्रक्रिया और कैशलेस मंजूरी को लेकर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, फिलहाल यह विवाद ग्राहक और बीमा कंपनी के अलग-अलग दावों के बीच है। अंतिम निर्णय क्लेम की पूरी जांच और पॉलिसी की शर्तों के आधार पर ही तय होगा।