केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 13 अप्रैल 2026 बेहद अहम तारीख बनती जा रही है। नेशनल काउंसिल ऑफ ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी की ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक में 8वें वेतन आयोग के लिए ‘शेयर मेमोरेंडम’ को अंतिम रूप दिया जाएगा। यही दस्तावेज आगे चलकर सैलरी, पेंशन और सर्विस कंडीशंस का आधार बनेगा। इससे पहले मार्च में हुई बैठक में भी इन मुद्दों पर चर्चा हुई थी, लेकिन अब इसे अंतिम दिशा देने की तैयारी है।
फिटमेंट फैक्टर पर सबसे ज्यादा चर्चा
इस पूरे मसले में सबसे ज्यादा फोकस ‘फिटमेंट फैक्टर’ पर है। यही वह मल्टीप्लायर होता है, जिससे कर्मचारियों की बेसिक सैलरी तय होती है। मौजूदा समय में कर्मचारी संगठन इसे 3.25 या उससे ज्यादा करने की मांग कर रहे हैं। शिव गोपाल मिश्रा ने आयोग को पत्र लिखकर अतिरिक्त मुद्दों को भी शामिल करने की मांग की है। उनका कहना है कि महंगाई के इस दौर में कर्मचारियों के जीवन स्तर को बनाए रखने के लिए सैलरी में बड़ा सुधार जरूरी है।
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DA मर्जर और भत्तों पर असर
बैठक में महंगाई भत्ते यानी DA के बेसिक सैलरी में विलय पर भी चर्चा हो सकती है। फिलहाल DA 58% के आसपास है और जल्द ही 60% तक पहुंचने की संभावना है। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि इसे बेसिक में जोड़ दिया जाए। अगर ऐसा होता है तो सैलरी के साथ-साथ HRA, TA, ग्रेच्युटी और पेंशन में भी स्वतः बढ़ोतरी हो जाएगी। इससे कर्मचारियों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ मिल सकता है।
18 महीने का समय, बड़ा फैसला बाकी
सरकार पहले ही 8वें वेतन आयोग का गठन कर चुकी है और आयोग को अपनी सिफारिशें देने के लिए 18 महीने का समय मिला है। इस दौरान आयोग वेतन ढांचे की समीक्षा करेगा और उसे संतुलित बनाने की कोशिश करेगा। 13 अप्रैल की बैठक के बाद तैयार होने वाला मेमोरेंडम यह तय करेगा कि आयोग कर्मचारियों की मांगों को किस हद तक स्वीकार करता है।
क्या सच में बढ़ेगी सैलरी?
अगर फिटमेंट फैक्टर 3.25 तक पहुंचता है और DA का मर्जर होता है, तो यह लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। हालांकि अंतिम फैसला सरकार और आयोग की सिफारिशों पर निर्भर करेगा। फिलहाल सभी की नजर इस बैठक पर टिकी है, जो आने वाले समय में कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को नई दिशा दे सकती है।