केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारी और पेंशनभोगी इन दिनों एक ही सवाल पूछ रहे हैं, आठवां वेतन आयोग कब लागू होगा और सैलरी कितनी बढ़ेगी। आयोग के गठन की अधिसूचना आने के बाद से सरकारी दफ्तरों में चर्चा तेज है। जानकारों का मानना है कि इसकी सिफारिशें 2027 के आखिर या 2028 की शुरुआत में लागू हो सकती हैं। लेकिन तारीख से ज्यादा कर्मचारियों की नजर उस गणना पर है, जिससे उनकी असली सैलरी तय होगी।
फिटमेंट फैक्टर क्यों है सबसे अहम
सरकारी सैलरी तय करने में फिटमेंट फैक्टर सबसे बड़ा आधार होता है। आसान भाषा में कहें तो मौजूदा बेसिक सैलरी को इसी संख्या से गुणा किया जाता है। सातवें वेतन आयोग में यह फैक्टर 2.57 था, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी 7440 रुपये से बढ़कर 18000 रुपये हो गई थी। अब आठवें वेतन आयोग में यही फैक्टर पूरी तस्वीर बदल सकता है।
कर्मचारी संगठनों की बड़ी मांग
डाक कर्मचारियों के संगठन ने सरकार के सामने मांग रखी है कि सभी श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए फिटमेंट फैक्टर 3 से 3.5 के बीच होना चाहिए। उनका तर्क है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है और मौजूदा सैलरी में गुजारा मुश्किल होता जा रहा है। वहीं दूसरी ओर यह चर्चा भी है कि सरकार इसे 2 तक सीमित रख सकती है। यहीं से कर्मचारियों की चिंता और उम्मीद दोनों जुड़ी हैं।
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फैक्टर 2 हुआ तो क्या बदलेगा
अगर सरकार फिटमेंट फैक्टर 2 तय करती है तो भी सैलरी में बड़ा इजाफा होगा। लेवल 1 के कर्मचारी जैसे चपरासी या एंट्री लेवल स्टाफ की मौजूदा बेसिक सैलरी 18000 रुपये है। फैक्टर 2 लगने पर यह सीधे 36000 रुपये हो जाएगी। लेवल 10 के अधिकारियों की सैलरी 56100 रुपये से बढ़कर 112200 रुपये हो सकती है। सबसे ऊंचे स्तर पर यह बढ़ोतरी करीब 500000 रुपये तक पहुंच सकती है।
फैक्टर 3 बना तो लॉटरी जैसी बढ़ोतरी
अगर कर्मचारी संगठनों की मांग मान ली गई और फिटमेंट फैक्टर 3 तय हुआ तो सैलरी में जबरदस्त उछाल आएगा। लेवल 1 के कर्मचारी की बेसिक सैलरी 54000 रुपये तक पहुंच सकती है। लेवल 10 के अधिकारियों को करीब 168300 रुपये मिल सकते हैं। वहीं शीर्ष पदों पर यह सैलरी 750000 रुपये तक जा सकती है। यही वजह है कि कर्मचारी फैक्टर 3 पर जोर दे रहे हैं।
25 फरवरी की बैठक पर टिकी नजर
अब सभी की नजर 25 फरवरी को होने वाली अहम बैठक पर है। इस बैठक में कर्मचारियों की मांगों को अंतिम रूप दिया जाएगा और उन्हें वेतन आयोग के सामने रखा जाएगा। माना जा रहा है कि इसी के बाद साफ होगा कि सरकार कर्मचारियों को कितनी राहत देने के मूड में है। तब तक चपरासी से लेकर बड़े अफसर तक सबकी निगाहें इसी फैसले पर टिकी हैं।