लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान बिजली उत्पादन, वितरण और खरीद को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई। समाजवादी पार्टी की विधायक रागिनी सोनकर ने राज्य में बिजली की असमानता पर बड़ा सवाल उठाया। सपा के महंगी बिजली अदानी से खरीदने के आरोप को लेकर ऊर्जा मंत्री ने जवाब दिया कि हम जिस रेट पर बिजली खरीद रहे हैं उस रेट से ₹1 प्रति यूनिट ज्यादा 10 साल पहले समाजवादी की सरकार में बिजली खरीदी गई थी।
ऊर्जा मंत्री ने दिया करारा जवाब
स्मार्ट मीटर पर भी उर्जा मंत्री ने सपा के आरोपों को करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर स्मार्ट मीटर सामान्य मीटर का अपग्रेड वर्जन है एक स्मार्टफोन की तरह और वह बेहतर काम कर रहा है। कहीं से कोई भी शिकायत नहीं है। बराबर बिजली का उतना ही खर्च होता है, जितना जनरल मीटर में किया जाता है।
सपा सरकार ने साल 2014 में महंगी बिजली खरीदी
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ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने सपा विधायक रागिनी सोनकर के सवालों के जवाब दिए। कहा, विधायक की शिकायतें सही नहीं हैं। समाजवादी पार्टी की सरकार ने 10 साल पहले (2014 में) केएसके लिमिटेड से 6.25 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदी थी, वह इससे ज्यादा महंगी थी। मंत्री ने उपलब्धियां गिनाईं। कहा, 2.50 लाख गांव-मजरों में बिजली पहुंचाई गई। साल 1947 से 2017 तक कुल बिजली उत्पादन करीब 6 हजार मेगावाट से ज्यादा नहीं था। यह अब 11 हजार मेगावाट से अधिक हो गया है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने भी हस्तक्षेप किया। ग्रामीण क्षेत्रों में 20 घंटे बिजली आपूर्ति देने की मांग की। उन्होंने ऊर्जा मंत्री से इस पर घोषणा करने को कहा।
अच्छा उपकरण है स्मार्ट मीटर
स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर एके शर्मा ने कहा कि यह एक अच्छा उपकरण है। इससे शिकायतों का समाधान हो रहा है। रेगुलर मीटर वाले उपभोक्ताओं से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जा रहा। दोनों तरह के मीटर समान रूप से काम कर रहे हैं। इस बहस से सदन में काफी हलचल रही, लेकिन अंत में कार्यवाही शांतिपूर्वक चली।