पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम तेजी से चर्चा में है। इस पूरे अभियान के केंद्र में 30 वर्षीय अभिजीत दीपके हैं। महाराष्ट्र के औरंगाबाद यानी छत्रपति संभाजीनगर से आने वाले अभिजीत पेशे से राजनीतिक संचार रणनीतिकार माने जाते हैं। उन्होंने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की और आगे की शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए। हाल ही में उन्होंने बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर डिग्री पूरी की है।
राजनीतिक दुनिया से पुराना जुड़ाव
अभिजीत का राजनीति और डिजिटल अभियानों से पुराना संबंध रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार वह 2020 से 2022 के बीच आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम में वॉलेंटियर के रूप में सक्रिय रहे। चुनावी अभियानों और डिजिटल कंटेंट रणनीति में भी उन्होंने काम किया। दिल्ली के शिक्षा विभाग से जुड़े संचार कार्यों में भी उनकी भूमिका बताई जाती है।
कैसे शुरू हुई कॉकरोच जनता पार्टी
इस अभियान की शुरुआत एक न्यायिक टिप्पणी के बाद पैदा हुई ऑनलाइन बहस से जुड़ी बताई जा रही है। सोशल मीडिया पर युवाओं के बीच नाराजगी और व्यंग्य का माहौल बना। इसी दौरान अभिजीत ने एक पोस्ट के जरिए सवाल उठाया कि अगर सारे “कॉकरोच” एक साथ आ जाएं तो क्या होगा। इसके बाद उन्होंने मजाकिया अंदाज में वेबसाइट और रजिस्ट्रेशन फॉर्म शुरू कर दिया।
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युवाओं को क्यों पसंद आई सोच
इस व्यंग्यात्मक मंच में शामिल होने की जो शर्तें रखी गईं, उन्होंने युवाओं का ध्यान खींचा। बेरोजगार होना, लगातार ऑनलाइन रहना और “प्रोफेशनल तरीके से भड़ास निकालना” जैसी बातें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं। जेनरेशन-ज़ेड के बीच यह शैली काफी चर्चा में आ गई और बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़ते दिखे।
राजनीतिक बहस में बदल गया मामला
शुरुआत भले मजाक से हुई लेकिन मामला धीरे-धीरे बेरोजगारी, परीक्षा विवाद और युवाओं की निराशा जैसे बड़े मुद्दों से जुड़ गया। कुछ राजनीतिक चेहरों ने भी सोशल मीडिया पर इस व्यंग्य का समर्थन किया। इसके बाद यह केवल इंटरनेट ट्रेंड नहीं रहा बल्कि एक व्यापक बहस का हिस्सा बन गया।
मजाक या बड़ा संदेश?
अभिजीत दीपके लगातार यह कहते रहे हैं कि यह एक व्यंग्यात्मक पहल है, लेकिन इसके जरिए युवाओं की नाराजगी और असंतोष सामने आया है। सोशल मीडिया के दौर में यह उदाहरण दिखाता है कि कभी-कभी एक मजाक भी बड़े राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का रूप ले सकता है।