Abhijit Dipke Spoke Student Movement: कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने छात्र आंदोलन को लेकर कहा कि जब उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग के साथ धरना शुरू किया था, तब उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह आंदोलन इतना व्यापक रूप ले लेगा। उनका कहना है कि यदि उन्हें पहले इसका अनुमान होता, तो वह संगठन के नाम में ‘पार्टी’ शब्द का इस्तेमाल नहीं करते। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी पारंपरिक राजनीतिक दल की तरह काम करना नहीं, बल्कि जनता का विश्वास हासिल करना है।
स्वतंत्र पहचान बनाए रखने की बात
अभिजीत दिपके ने कहा कि लोगों का राजनीतिक दलों पर भरोसा लगातार कम हो रहा है और संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे माहौल में उनका संगठन स्वतंत्र रूप से काम करना चाहता है। उन्होंने कहा कि उनका दावा है कि संगठन किसी भी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन नहीं करेगा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठाता रहेगा।
प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई पर लगाए आरोप
दिपके ने आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे और पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए थे। उनके अनुसार, प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ सख्ती बरती गई और कई लोगों को चोटें आईं। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की गई। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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सोनम वांगचुक को लेकर भी दिया बयान
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का जिक्र करते हुए दिपके ने दावा किया कि आंदोलन के दौरान उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा था। उन्होंने कहा कि उनकी टीम लगातार चाहती थी कि वांगचुक अपना अनशन समाप्त करें। दिपके ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वांगचुक और उनका संगठन अलग-अलग हैं, लेकिन इससे उनके उद्देश्य पर कोई असर नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि वांगचुक का स्वस्थ रहना और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहना देश के लिए महत्वपूर्ण है।
जन आंदोलन को बताया सबसे बड़ी ताकत
अभिजीत दिपके ने कहा कि छात्र आंदोलन की सफलता का श्रेय युवाओं की भागीदारी और जनसमर्थन को जाता है। उनके अनुसार, यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति या संगठन का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करने वाले छात्रों की सामूहिक आवाज है। उन्होंने कहा कि आगे भी उनका प्रयास शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को उठाने का रहेगा।