Students And Serious Offenders: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकारें प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को कानूनी प्रक्रिया के तहत वापस लेने या बंद करने के लिए स्वतंत्र हैं। अदालत ने कहा कि उसके 28 जुलाई के अंतरिम आदेश का यह अर्थ नहीं है कि राज्य सरकारें मुकदमे वापस नहीं ले सकतीं। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल लोगों को किसी प्रकार की राहत नहीं दी जाएगी।
कोर्ट ने दूर किया पिछले आदेश को लेकर भ्रम
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जांच जारी रखने के निर्देश का मतलब केवल जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाना था। यह आदेश राज्य सरकारों को कानूनी प्रक्रिया अपनाकर मुकदमे वापस लेने से नहीं रोकता। अदालत ने यह स्पष्टीकरण उस समय दिया जब याचिकाकर्ताओं ने बताया कि कुछ अधिकारी पिछले आदेश का हवाला देकर कार्रवाई जारी रखने की बात कह रहे हैं।
गंभीर अपराधियों को नहीं मिलेगी रियायत
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार निर्दोष छात्रों को राहत देने के पक्ष में है, लेकिन भीड़ में शामिल गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को छूट नहीं मिलनी चाहिए। अदालत ने भी कहा कि छात्रों की आड़ में छिपे गंभीर अपराध के आरोपी किसी रियायत के पात्र नहीं हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह सिद्धांत हत्या, दुष्कर्म, डकैती जैसे जघन्य मामलों पर लागू होगा, जबकि मामूली मामलों में नामजद छात्रों को इस श्रेणी में नहीं रखा जाएगा।
पुलिस कार्रवाई पर भी उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत से कहा कि आंदोलन की आड़ में निर्दोष छात्रों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। साथ ही बिना वर्दी के लाठीचार्ज करने और कथित अत्यधिक बल प्रयोग का मुद्दा भी उठाया गया। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि किसी पुलिस अधिकारी ने कानून का उल्लंघन किया है तो उसे भी संरक्षण नहीं मिलेगा और उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
18 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
सुनवाई के दौरान पुलिसकर्मियों के पक्ष से भी दलील दी गई कि प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए और महिला पुलिसकर्मियों के साथ भी दुर्व्यवहार हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र समिति के गठन पर विचार करेगा। अदालत ने अगली सुनवाई 18 अगस्त तय की है, जिसमें समिति के गठन, उसके कार्यक्षेत्र और आंदोलनों के दौरान कार्रवाई के लिए उचित प्रोटोकॉल पर विचार किया जाएगा।