Aisha Wahab Congress : अमेरिका की राजनीति में एक नया इतिहास बना है। 39 साल की आयशा वहाब अमेरिकी कांग्रेस पहुंचने वाली पहली अफगान-अमेरिकी महिला बन गई हैं। कैलिफोर्निया में हुए विशेष चुनाव में उन्होंने अपनी ही पार्टी की उम्मीदवार मेलिसा हर्नांडेज को हराकर यह बड़ी उपलब्धि हासिल की। उनकी जीत को प्रवासी समुदाय और महिलाओं के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
बचपन में ही सिर से उठ गया माता-पिता का साया
आयशा का जीवन शुरुआत से ही संघर्षों से भरा रहा। बचपन में ही उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया। उनके पिता की हत्या हो गई थी और कुछ समय बाद उनकी मां का भी निधन हो गया। इसके बाद कैलिफोर्निया के एक परिवार ने उन्हें गोद लिया और उनका पालन-पोषण किया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और राजनीति विज्ञान में डिग्री हासिल की। बाद में एमबीए और सोशल वर्क में डॉक्टरेट की पढ़ाई भी पूरी की।
आर्थिक संकट ने बढ़ाईं मुश्किलें
साल 2011 में आयशा और उनके परिवार पर एक और संकट आया। परिवार का घर जब्त हो गया, कारोबार बंद हो गया और आर्थिक हालात बिगड़ गए। इसी दौरान उनके गोद लिए पिता की तबीयत भी खराब रहने लगी और आयशा की नौकरी भी चली गई। इन मुश्किलों के बीच उन्होंने हार नहीं मानी और समाज के मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम करना शुरू किया।
स्थानीय राजनीति से शुरू हुआ सफर
आयशा ने हेवर्ड शहर में किफायती आवास और सामाजिक मुद्दों पर आवाज उठानी शुरू की। उनकी सक्रियता ने लोगों का ध्यान खींचा और 2018 में वह हेवर्ड सिटी काउंसिल के लिए चुनी गईं। इसके बाद 2022 में उन्होंने कैलिफोर्निया स्टेट लेजिस्लेचर का चुनाव जीता। वह ऐसा करने वाली पहली अफगान-अमेरिकी और पहली मुस्लिम महिला बनी थीं।
जनता के मुद्दों पर लड़ी चुनाव
आयशा ने अपने चुनाव अभियान में स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, आवास और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आम लोगों से जुड़े विषयों पर लगातार काम किया और इसी वजह से उन्हें व्यापक समर्थन मिला। उनकी राजनीति का केंद्र सामाजिक न्याय और आम लोगों की जरूरतें रही हैं।
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व्हाइट हाउस तक पहुंची पहचान
राजनीति में आने से पहले और बाद में भी आयशा कई सामाजिक संगठनों से जुड़ी रहीं। उन्होंने महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के अधिकारों के लिए काम किया। उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हें व्हाइट हाउस के अफगान-अमेरिकी नेताओं के विशेष समूह में भी शामिल किया गया था। अब अमेरिकी कांग्रेस तक पहुंचकर उन्होंने साबित कर दिया है कि कठिन से कठिन हालात भी किसी के सपनों को रोक नहीं सकते।