
पड़ोसी देश अफगानिस्तान एक बार फिर भूकंप की भीषण त्रासदी से हिल गया है। रविवार देर रात कुनार प्रांत में आए तेज झटकों ने तबाही मचा कर रख दी। जिससे अब तक 622 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 1500 से ज्यादा लोग घायल हैं। अफगानिस्तान के आंतरिक मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल मतीन कानी ने जानकारी देते हुए बताया कि सिर्फ कुनार प्रांत में ही 610 लोगों ने अपनी जान गंवाई और 1300 से ज्यादा घायल हुए हैं। जबकि नंगरहार प्रांत में 12 लोगों की मौत और 255 लोगों के घायल होने की खबर सामने आई है।
भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.0 मापी गई। यह झटका इतना शक्तिशाली था कि पाकिस्तान और भारत की राजधानी दिल्ली-NCR तक महसूस किया गया। आधी रात को जब लोग गहरी नींद में थे, तभी धरती हिलने लगी। अचानक झटके महसूस होते ही लोग घरों से बाहर निकल आए। दिल्ली और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों ने बताया कि इमारतें हिलने लगी थीं, जिससे घबराकर सभी लोग बाहर भाग निकले।
मलबे में तब्दील हुए सैकड़ों घर, मची चीख-पुकार
अफगानिस्तान के भूकंप से प्रभावित इलाकों में चारों तरफ मलबा बिखरा पड़ा है। वहीं कई घर पूरी तरह ढह गए हैं। घटना के बाद से ही बचाव दल लगातार राहत कार्यों में जुटे हुए हैं, लेकिन दूरदराज इलाकों तक पहुंचना बड़ी चुनौती बना हुआ है। इतना ही नहीं संचार व्यवस्था सीमित होने के कारण कई जगहों पर मदद देर से पहुंच रही है। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि कई लोग अब भी मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं।
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भूकंप का केंद्र
संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान के जलालाबाद से 27 किलोमीटर पूर्व-उत्तर पूर्व में 8 किलोमीटर की गहराई पर था। भारतीय समयानुसार झटके रात 12:47 बजे महसूस किए गए। इसके करीब 20 मिनट बाद एक और झटका आया जिसकी तीव्रता 4.5 थी और यह 10 किलोमीटर गहराई पर था।
आखिर क्यों आते हैं बार-बार भूकंप?
विशेषज्ञों का मानना है कि अफगानिस्तान और उसके पड़ोसी हिमालयी क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील हैं। यहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटें लगातार आपस में टकरा रही हैं। लाखों साल पहले इसी टकराव ने हिमालय का निर्माण किया था और यह प्रक्रिया आज भी जारी है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में अक्सर शक्तिशाली भूकंप आते रहते हैं।
अफगानिस्तान इस समय गहरी त्रासदी से गुजर रहा है। राहत और बचाव कार्य तेजी से जारी हैं, लेकिन हालात अभी भी गंभीर बने हुए हैं। मौत का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जबकि घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है।