AI Water Consumption: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI धीरे-धीरे हमारी लाइफ का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। अब किसी भी तरह के सवाल का जवाब पाने के लिए लोग एआई का सहारा ले रहे हैं। एआई सेंकड़ में सवाल का जवाब दे देता है। एआई ने लोगों की जिंदगी आसान बना दी है। लेकिन यही एआई चुपचाप धरती का पानी पी रहा है और वो भी इतनी मात्रा में कि अब खतरे की घंटी बजने लगी है। जी हां नए शोधों से जो बात सामने आ रही है वो डराने वाली है।
AI पानी का भी दुश्मन
आपको बता दें कि अलग-अलग अध्ययनों के मुताबिक, AI पानी का भी दुश्मन है। जी हां ये बात सुनने में भले थोड़ा अजीब लग रहा होगा, लेकिन सच्चाई यही है कि AI का हर सवाल-जवाब कहीं न कहीं प्रकृति से भारी कीमत वसूल रहा है।
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पानी AI का असली ईंधन
ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विस फर्म मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2028 तक AI डेटा सेंटर्स के पानी की खपत सलाना 1 हजार 68 बिलियन लीटर तक पहुंच सकती है, जो 2024 के मुकाबले 11 गुना ज्यादा है। एआई के बड़े-बड़े डेटा सेंटर्स है, जहां हजारों सर्वर दिन-रात चलते रहते हैं। जब ये सर्वर काम करते हैं, तो यह गर्म हो जाते हैं। डेटा सेंटर को ठंडा करने के लिए पानी की जरुरत पड़ती है और उसमें इस्तेमाल किया गया 80 फीसदी से ज्यादा पानी भाप बनकर उड़ जाता है। पानी असल में AI का असली ईंधन है।
बिजली और पानी बड़ा मुद्दा
कैलिकोर्निया यूनिवर्सिटी के मुताबिक, 100 शब्द का सिंपल ईमेल जेनरेट करने के लिए AI चैटबॉट का कूलिंग सिस्टम आधा से तीन बोतल (200ml से 1500 ml) तक पानी कंजूम करता है। ऐसे में एआई चलाने वाले डेटा सेंटर्स दुनिया के लिए जल संकट पैदा कर सकते हैं। नेचर फाइनेंस की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के लगभग 45% डेटा सेंटर्स ऐसी जगहों पर हैं जहां पहले से ही पानी की भारी कमी है। भारत, चीन, स्पेन और जर्मनी जैसे देशों में यह समस्या और भी ज्यादा है। इसके साथ ही डेटा सेंटर्स को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली भी चाहता है और बिजली का मतलब ज्यादा कार्बन उत्सर्जन है।