उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी हलचल तेज हो चुकी है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव जहां PDA यानी पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक फार्मूले पर दांव लगा रहे हैं, वहीं उनकी राह मुश्किल बनाने के लिए AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और BSP सुप्रीमो मायावती अपनी-अपनी रणनीति में जुट गए हैं। जहां मायावती लगातार दलित वोटों को वापस अपने पाले में लाने की कवायद कर रही हैं, वहीं ओवैसी ने बिहार चुनाव में मिली सफलता के बाद साफ संकेत दे दिए हैं कि वे यूपी में बड़ा खेल खेलने उतरे हैं। यही वजह है कि सूबे की राजनीति में अभी से हलचल बढ़ गई है।
AIMIM ने 5 सीटों पर जीत हासिल की
AIMIM चीफ ओवैसी ने हाल ही में बयान दिया कि बिहार चुनाव में महागठबंधन ने उन्हें कमजोर समझकर कम सीटें दीं, लेकिन नतीजों ने सबक सिखा दिया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव भी यूपी में AIMIM को हल्के में ले रहे हैं, मगर 2027 में इसका नतीजा उन्हें भुगतना पड़ेगा। दरअसल, बिहार में AIMIM ने 5 सीटों पर जीत हासिल की और कई सीटों पर दूसरे नंबर पर रही, जिससे पार्टी का मनोबल काफी बढ़ा है। इसी आधार पर ओवैसी ने घोषणा की कि यूपी में वे कम से कम 48 सीटों पर असर डालने की स्थिति में हैं।
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ओवैसी ने कसा अखिलेश पर तंज
ओवैसी ने आरोप लगाया कि महागठबंधन और सपा जैसी पार्टियों ने AIMIM को हमेशा खत्म करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि विपक्ष सोचता है कि वे उन्हें अकेला छोड़कर कमजोर कर देंगे, लेकिन अब AIMIM अपनी रणनीति के साथ तैयार है। ओवैसी ने तंज कसते हुए कहा अगर वे सियासी चेस खेलना जानते हैं, तो हम भी उससे बेहतर खेलना जानते हैं। उनका कहना है कि अगर विपक्ष उन्हें परेशान करेगा, तो वे भी बराबर जवाब देंगे। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अल्पसंख्यक वोटों पर ओवैसी की रणनीति सपा की PDA प्लानिंग को चुनौती दे सकती है।
अखिलेश के भीतर रणनीतिक कमियां
AIMIM प्रमुख ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी हमला बोलते हुए कहा कि 2014, 2017, 2019, 2022 और 2024 हर बड़े चुनाव में सपा को उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिले। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश बीजेपी की जीत का ठीकरा AIMIM पर फोड़ते हैं, जबकि असल वजह उनके भीतर की रणनीतिक कमियां हैं। ओवैसी ने दावा किया कि 2027 में वे सिर्फ असर नहीं, बल्कि सीधी जीत के लिए चुनावी मैदान में उतरेंगे। उनके मुताबिक आने वाला चुनाव यूपी की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है, और यह बात अखिलेश को शायद पसंद नहीं आएगी।