UCC and Vande Mataram: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्डने समान नागरिक संहिता और कुछ राज्यों में वंदे मातरम् के अनिवार्य गायन को लेकर अपनी आपत्तियां सार्वजनिक रूप से सामने रखी हैं। बोर्ड का कहना है कि इन मुद्दों पर गंभीर संवैधानिक और धार्मिक सवाल मौजूद हैं। संगठन ने घोषणा की है कि जहां-जहां UCC लागू किया जाएगा, वहां उसे अदालत में चुनौती दी जाएगी। साथ ही देश में मुस्लिम समुदाय से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर व्यापक अभियान चलाने की भी बात कही गई है।
कार्यकारिणी बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा
AIMPLB के प्रवक्ता सय्यद कासिम रसूल इलियास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि हाल ही में हुई कार्यकारिणी बैठक में मुस्लिम समुदाय से जुड़े कई विषयों पर चर्चा की गई। बैठक में कथित तौर पर मस्जिदों, मदरसों पर कार्रवाई, सांप्रदायिक तनाव और विभिन्न राज्यों में सामने आए घटनाक्रमों पर चिंता व्यक्त की गई। बोर्ड ने कहा कि इन मुद्दों पर विस्तृत दस्तावेज तैयार कर सार्वजनिक किया जाएगा।
वंदे मातरम् को लेकर जताई आपत्ति
बोर्ड का कहना है कि वंदे मातरम् के अनिवार्य गायन को लेकर उसकी आपत्ति धार्मिक आधार पर है। AIMPLB के अनुसार, इस्लाम के एकेश्वरवाद के सिद्धांत और गीत की कुछ पंक्तियों को लेकर वैचारिक मतभेद हैं। हालांकि संगठन ने यह भी कहा कि राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़ा होना अलग बात है, लेकिन उसके गायन को अनिवार्य बनाना उचित नहीं माना जा सकता।
UCC को अदालत में चुनौती देने की तैयारी
AIMPLB ने स्पष्ट किया है कि जिन राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी, वहां उसके प्रावधानों को हाईकोर्ट और आवश्यकता पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। बोर्ड का मानना है कि इस विषय पर संवैधानिक और कानूनी समीक्षा जरूरी है। संगठन ने कहा कि वह कानूनी विशेषज्ञों की मदद से अपनी रणनीति तैयार कर रहा है।
देशव्यापी अभियान चलाने की घोषणा
बोर्ड ने सामाजिक और संवैधानिक मुद्दों को लेकर देशभर में जागरूकता अभियान शुरू करने का फैसला भी किया है। इसके लिए एक विशेष समिति गठित की गई है, जो विभिन्न राज्यों में सम्मेलन, संवाद कार्यक्रम और यात्राओं का आयोजन करेगी। AIMPLB का कहना है कि उसका उद्देश्य शांति, संवाद और संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर लोगों को जागरूक करना है।