अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच एविएशन सेक्टर पर महंगाई का असर साफ दिखने लगा है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने एयरलाइंस की लागत बढ़ा दी है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में ATF की कीमत बढ़कर 1.43 लाख रुपये प्रति किलोलीटर से ज्यादा हो गई है। ईंधन लागत किसी भी एयरलाइन के खर्च का बड़ा हिस्सा होती है, ऐसे में इसका सीधा असर उड़ानों के संचालन पर पड़ना तय है।
रोजाना 100 उड़ानों में कटौती
इसी दबाव के चलते एयर इंडिया ने बड़ा फैसला लेते हुए अपनी रोजाना उड़ानों में कटौती करने का निर्णय लिया है। कंपनी फिलहाल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मिलाकर करीब 1100 उड़ानें संचालित करती है, जिनमें से लगभग 100 उड़ानों को जून तक अस्थायी रूप से बंद किया जाएगा। यह कदम लागत को नियंत्रित करने और परिचालन को संतुलित रखने के लिए उठाया गया है।
लंबे रूट ने बढ़ाई परेशानी
स्थिति को और जटिल बना रहा है Pakistan का हवाई क्षेत्र बंद होना। इसके चलते भारत से यूरोप, नॉर्थ अमेरिका और अन्य देशों की उड़ानों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इससे ईंधन की खपत बढ़ रही है और क्रू की लागत भी ज्यादा हो रही है। यानी एक ही फ्लाइट अब पहले से ज्यादा महंगी पड़ रही है, जिससे एयरलाइंस की कमाई पर दबाव बढ़ गया है।
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इंडस्ट्री ने दी चेतावनी
Federation of Indian Airlines पहले ही सरकार को चेतावनी दे चुका है कि अगर लागत कम करने के उपाय नहीं किए गए, तो सेवाओं पर और असर पड़ सकता है। इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी कंपनियां लगातार बढ़ते खर्च से जूझ रही हैं। ऐसे में आने वाले समय में किराए बढ़ने या और फ्लाइट्स कम होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
यात्रियों पर क्या होगा असर
उड़ानों में कटौती का असर सीधे यात्रियों पर पड़ेगा। कम फ्लाइट्स का मतलब है टिकट की कीमतों में बढ़ोतरी और सीटों की उपलब्धता में कमी। खासकर पीक सीजन में यात्रियों को महंगे टिकट और सीमित विकल्पों का सामना करना पड़ सकता है। मौजूदा हालात बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय संकट अब धीरे-धीरे आम यात्रियों की जेब पर भी असर डाल रहा है।