सोशल मीडिया पर हाल ही में एक पोस्ट तेजी से वायरल हुई, जिसमें दावा किया गया कि एयर इंडिया ने फ्यूल शॉर्टेज के कारण जुलाई तक अपनी सभी इंटरनेशनल फ्लाइट्स बंद कर दी हैं। हालांकि एयर इंडिया ने इस खबर को पूरी तरह फर्जी बताया है। कंपनी ने साफ किया कि सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद नहीं की गई हैं, लेकिन कुछ रूट्स पर फ्लाइट्स की संख्या में कटौती जरूर की जा रही है। यह फैसला बढ़ती ईंधन लागत और वैश्विक हालात को देखते हुए लिया गया है। एयर इंडिया ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
कई रूट्स पर फ्लाइट्स कम
रिपोर्ट्स के मुताबिक एयर इंडिया ने दिल्ली से शिकागो, नेवार्क, सिंगापुर और शंघाई के लिए उड़ानें अस्थायी रूप से सस्पेंड करने का फैसला लिया है। इसके अलावा सैन फ्रांसिस्को, पेरिस और टोरंटो जाने वाली फ्लाइट्स की संख्या भी घटा दी गई है। कंपनी रोजाना करीब 100 उड़ानों में कटौती कर रही है। एयरलाइन का कहना है कि जेट फ्यूल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और लंबे रूट्स के कारण कई इंटरनेशनल रूट्स घाटे का सौदा बन चुके हैं।
तेल की कीमतों ने बढ़ाई मुश्किल
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब एविएशन सेक्टर पर साफ दिखाई देने लगा है। जेट फ्यूल की कीमत फरवरी के अंत में जहां करीब 99 डॉलर प्रति बैरल थी, वहीं अब यह बढ़कर 162 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। एयरलाइन कंपनियों के कुल ऑपरेटिंग खर्च में फ्यूल की हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी तक होती है। ऐसे में कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी भी कंपनियों के मुनाफे पर बड़ा असर डालती है। एयर इंडिया समेत कई कंपनियां अब लागत कम करने के लिए रूट्स की समीक्षा कर रही हैं।
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लंबे रूट्स ने बढ़ाया खर्च
पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने और पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में तनाव के कारण भारतीय एयरलाइंस को लंबा रूट लेना पड़ रहा है। खासकर यूरोप और नॉर्थ अमेरिका जाने वाली उड़ानों का सफर पहले से ज्यादा लंबा हो गया है। इससे फ्यूल की खपत और ऑपरेशन कॉस्ट दोनों बढ़ गए हैं। एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने भी कर्मचारियों को बताया कि कंपनी आने वाले समय में इंटरनेशनल फ्लाइट्स में और कटौती कर सकती है अगर हालात नहीं सुधरे।
20 हजार करोड़ से ज्यादा घाटा
एयर इंडिया पहले से ही भारी वित्तीय दबाव का सामना कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी का घाटा 20 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है। टाटा समूह और सिंगापुर एयरलाइंस पर कंपनी की आर्थिक स्थिति सुधारने का दबाव लगातार बढ़ रहा है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कई रूट्स पर एयर इंडिया ऑपरेटिंग कॉस्ट तक नहीं निकाल पा रही है। यही वजह है कि घाटे वाले रूट्स पर उड़ानों की संख्या कम की जा रही है।
यात्रियों पर भी असर संभव
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जेट फ्यूल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो आने वाले समय में हवाई टिकट और महंगे हो सकते हैं। कई एयरलाइंस अतिरिक्त ईंधन लागत का बोझ यात्रियों पर डाल सकती हैं। फिलहाल एयर इंडिया स्थिति संभालने के लिए उड़ानों में कटौती और खर्च कम करने की रणनीति पर काम कर रही है। लेकिन वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे तो एविएशन सेक्टर पर दबाव और बढ़ सकता है।