टाटा ग्रुप की एयर इंडिया लगातार वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार, 2022 में अधिग्रहण के बाद से एयरलाइन को 55,000 करोड़ रुपये से अधिक का कुल नुकसान हो चुका है। पिछले एक साल में ही कंपनी को करीब 28,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त घाटा हुआ है। बढ़ते नुकसान ने टाटा समूह की चिंता बढ़ा दी है और अब एयरलाइन को अपने खर्चों पर नियंत्रण करने तथा कारोबार को स्थिर करने की सलाह दी गई है। माना जा रहा है कि कंपनी आने वाले समय में अपनी विस्तार योजनाओं की रफ्तार कम कर सकती है।
विमानों की डिलीवरी टालने की तैयारी
एयर इंडिया ने पहले एयरबस और बोइंग से बड़ी संख्या में नए विमानों का ऑर्डर दिया था। अब कंपनी इन विमानों की डिलीवरी की गति धीमी करने पर विचार कर रही है। इसका मकसद एकमुश्त होने वाले बड़े भुगतान को टालना और नकदी पर दबाव कम करना है। जानकारी के अनुसार, एयर इंडिया इस संबंध में विमान निर्माताओं के साथ बातचीत भी कर रही है। यदि ऐसा होता है तो एयरलाइन के आधुनिकीकरण कार्यक्रम की गति कुछ समय के लिए धीमी पड़ सकती है।
नई उड़ानों पर भी लग सकता है ब्रेक
कंपनी सिर्फ विमान खरीद पर ही नहीं बल्कि नए रूट और नई सेवाओं की योजनाओं की भी समीक्षा कर रही है। कुछ प्रस्तावित घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को टाला जा सकता है, जबकि कुछ रूटों पर सेवाएं सीमित की जा सकती हैं। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे नए केंद्रों पर परिचालन शुरू करने की समयसीमा भी आगे बढ़ सकती है। एयर इंडिया का मानना है कि फिलहाल तेजी से विस्तार करने के बजाय मौजूदा संचालन को मजबूत करना ज्यादा जरूरी है।
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कई घटनाओं ने बढ़ाईं मुश्किलें
पिछले एक वर्ष में एयर इंडिया को कई बाहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। अहमदाबाद विमान हादसे के बाद परिचालन और सुरक्षा प्रक्रियाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा। इसके अलावा क्षेत्रीय तनावों के कारण कई उड़ानों को लंबे रास्तों से संचालित करना पड़ा, जिससे ईंधन खर्च बढ़ गया। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और रुपये की कमजोरी ने भी एयरलाइन की लागत में इजाफा किया। चूंकि कंपनी के कई बड़े खर्च विदेशी मुद्रा में होते हैं, इसलिए विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का सीधा असर उसके वित्तीय प्रदर्शन पर पड़ा।
आगे क्या होगी रणनीति?
टाटा समूह चाहता है कि एयर इंडिया फिलहाल आक्रामक विस्तार के बजाय स्थिरता और लाभप्रदता पर ध्यान दे। लागत घटाने, परिचालन दक्षता बढ़ाने और नकदी प्रबंधन को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि एयर इंडिया ने साफ किया है कि वह अपने दीर्घकालिक बदलाव और बेड़े के आधुनिकीकरण की योजना से पीछे नहीं हटेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनी खर्चों को नियंत्रित करने और सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने में सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में वह घाटे से उबरकर फिर से मजबूत स्थिति में लौट सकती है।