दिल्ली से वाराणसी के बीच प्रस्तावित हाईस्पीड बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर बड़ी प्रगति सामने आई है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन ने दिल्ली से आगरा तक के रूट का अलाइनमेंट तैयार कर संबंधित प्राधिकरणों को सौंप दिया है। इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि गौतमबुद्ध नगर जिले को एक नहीं बल्कि तीन बड़े स्टेशन मिलने जा रहे हैं। इससे नोएडा, ग्रेटर नोएडा और जेवर क्षेत्र सीधे देश के सबसे आधुनिक रेल नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। माना जा रहा है कि यह परियोजना पूरे एनसीआर की तस्वीर बदलने वाली साबित हो सकती है।
नोएडा को मिलेगा पहला बड़ा फायदा
इस हाईस्पीड कॉरिडोर की शुरुआत दिल्ली के सराय काले खां क्षेत्र से होगी। इसके बाद ट्रेन सीधे नोएडा पहुंचेगी, जहां सेक्टर-98 के पास स्टेशन प्रस्तावित किया गया है। यह इलाका नोएडा एक्सप्रेसवे से जुड़ा हुआ है और लाखों लोगों के लिए प्रमुख केंद्र माना जाता है। इस स्टेशन के बनने से दिल्ली और नोएडा के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। साथ ही यहां रहने वाले लोगों को देश के अन्य बड़े शहरों तक तेज रफ्तार कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा।
ग्रेटर नोएडा और जेवर होंगे कनेक्ट
नोएडा के बाद दूसरा स्टेशन ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में बनाया जाएगा। यह स्टेशन शिक्षा संस्थानों, टेक्नोलॉजी पार्क और तेजी से विकसित हो रहे आवासीय क्षेत्रों को फायदा पहुंचाएगा। इसके बाद तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण स्टेशन जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास बनेगा। इससे हवाई और रेल यात्रा का शानदार मेल देखने को मिलेगा। यात्रियों को एयरपोर्ट से सीधे हाईस्पीड ट्रेन की सुविधा मिल सकेगी, जिससे लंबी दूरी का सफर और आसान हो जाएगा।
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350 किलोमीटर प्रति घंटा होगी रफ्तार
अधिकारियों के अनुसार इस कॉरिडोर पर ट्रेनें 300 से 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी। इतनी तेज गति के कारण दिल्ली से आगरा और वाराणसी तक का सफर वर्तमान समय की तुलना में काफी कम हो जाएगा। हाईस्पीड नेटवर्क का उद्देश्य बड़े शहरों के बीच यात्रा को तेज, सुरक्षित और आधुनिक बनाना है। इससे व्यापार, पर्यटन और निवेश को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
रियल एस्टेट में आ सकता है उछाल
परियोजना के तहत गौतमबुद्ध नगर में तीन स्टेशन बनने की खबर से रियल एस्टेट सेक्टर में उत्साह देखा जा रहा है। नोएडा एक्सप्रेसवे, ग्रेटर नोएडा और जेवर एयरपोर्ट के आसपास जमीन और आवासीय परियोजनाओं की मांग बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाईस्पीड रेल कनेक्टिविटी मिलने के बाद इन क्षेत्रों में निवेश तेजी से बढ़ेगा। अब आगे जमीन अधिग्रहण और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा कर परियोजना को गति देने की तैयारी की जा रही है। अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ तो आने वाले वर्षों में यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के विकास की नई पहचान बन सकता है।