टाटा संस के लिए नए बिजनेस अब उम्मीद के बजाय चुनौती बनते जा रहे हैं। खासकर एयर इंडिया का बढ़ता घाटा कंपनी के लिए बड़ा सिरदर्द बन गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 तक एयर इंडिया का नुकसान करीब 20000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जो पहले के अनुमान से कई गुना ज्यादा है। शुरुआती 9 महीनों में ही लगभग 15000 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया जा चुका है, जिससे कंपनी पर आर्थिक दबाव साफ दिख रहा है।
बजट छोटा, नुकसान हुआ बड़ा
एयर इंडिया के लिए तय किया गया बजट करीब 2000 करोड़ रुपये था, लेकिन हालात ऐसे बने कि नुकसान 20000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष में भी कंपनी को लगभग 11000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। इससे साफ है कि सुधार की उम्मीदों के बावजूद हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। भारी ऑपरेशनल लागत, विस्तार की योजनाएं और सिस्टम सुधार में हो रहे खर्च ने इस घाटे को और बढ़ा दिया है।
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नए कारोबार भी बने बोझ
टाटा संस के अन्य नए कारोबार भी कंपनी के लिए राहत नहीं दे पा रहे हैं। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती 9 महीनों में ही करीब 21700 करोड़ रुपये का कुल नुकसान दर्ज किया गया है, जो पिछले साल के कुल घाटे 16550 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। इन कारोबारों में टाटा डिजिटल, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और टेजस नेटवर्क्स जैसे नाम शामिल हैं, जहां बढ़ती लागत और धीमी ग्रोथ ने चिंता बढ़ा दी है।
दूसरे सेक्टर भी दबाव में
सिर्फ एयर इंडिया ही नहीं, बल्कि अन्य बिजनेस भी नुकसान की मार झेल रहे हैं। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स में करीब 3000 करोड़ रुपये का घाटा होने का अनुमान है, जबकि टेजस नेटवर्क्स का नुकसान 1000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यह स्थिति दिखाती है कि ग्रुप के कई नए वेंचर्स अभी स्थिरता हासिल नहीं कर पाए हैं और लगातार निवेश की जरूरत पड़ रही है।
आगे की रणनीति पर असर
लगातार बढ़ते घाटे का असर टाटा संस की भविष्य की योजनाओं पर भी पड़ सकता है। विस्तार और नए निवेश के फैसले अब ज्यादा सावधानी के साथ लेने होंगे। कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह इन घाटे वाले कारोबारों को कब तक संभाल पाती है और कब इन्हें मुनाफे में बदल पाती है। फिलहाल हालात यह संकेत दे रहे हैं कि टाटा के लिए यह दौर आसान नहीं होने वाला है और आने वाले समय में बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं।