Air India New CEO : टाटा समूह की एयरलाइन एयर इंडिया में बड़े बदलाव की शुरुआत हो गई है। नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नामित तेवोल्दे गेब्रेमरियम ने आधिकारिक तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभाल ली है। टाटा सन्स के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने टाउन हॉल बैठक के दौरान उन्हें कर्मचारियों से परिचित कराया। ऐसे समय में उन्हें यह जिम्मेदारी मिली है जब एयर इंडिया परिचालन चुनौतियों और वित्तीय दबाव से जूझ रही है।
सुरक्षा और संचालन पर रहेगा फोकस
नए CEO की पहली प्राथमिकता उड़ानों की सुरक्षा, इंजीनियरिंग क्षमता और यात्रियों के भरोसे को मजबूत करना होगी। एयर इंडिया लगातार अपने विमान बेड़े का विस्तार कर रही है, लेकिन इसके साथ तकनीकी और रखरखाव संबंधी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। ऐसे में तेवोल्दे का अंतरराष्ट्रीय विमानन क्षेत्र का अनुभव कंपनी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
महंगे ईंधन और बदले रूट बने परेशानी
एयरलाइन इस समय कई मोर्चों पर दबाव झेल रही है। विमान ईंधन की बढ़ती कीमतों और कई देशों के हवाई क्षेत्र बंद होने से परिचालन लागत में भारी वृद्धि हुई है। यूरोप और अमेरिका जाने वाली कई उड़ानों के मार्ग बदलने पड़े हैं, जिससे यात्रा समय और खर्च दोनों बढ़े हैं। इसके अलावा पायलटों की कमी भी कंपनी के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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खर्च कम करने की रणनीति तैयार
एयर इंडिया अब लागत नियंत्रण पर विशेष ध्यान दे रही है। कंपनी नए विमानों की डिलीवरी योजना की समीक्षा कर रही है ताकि अनावश्यक खर्चों को रोका जा सके। बताया जा रहा है कि कुछ विमानों की डिलीवरी आगे बढ़ाने पर भी विचार किया गया है। नए CEO की रिपोर्ट के बाद इन फैसलों पर अंतिम मुहर लग सकती है।
चेयरमैन का चार सूत्रीय मंत्र
टाटा सन्स के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि खर्चों पर नियंत्रण कंपनी की प्राथमिकता है। उन्होंने सुरक्षा, ग्राहकों का भरोसा, बेहतर संचालन और लागत अनुशासन को एयर इंडिया की भविष्य की रणनीति का आधार बताया। उनका कहना है कि हर कर्मचारी लागत कम करने और दक्षता बढ़ाने में योगदान दे सकता है।
घाटे से मुनाफे तक की अग्निपरीक्षा
एयर इंडिया अब तक 26 हजार करोड़ रुपये से अधिक का घाटा दर्ज कर चुकी है। इस स्थिति से उबरने के लिए टाटा सन्स करीब 10 हजार करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दे चुका है। वहीं अन्य निवेशकों से भी सहयोग की संभावना पर विचार हो रहा है। अब सबसे बड़ी चुनौती नए CEO के सामने है, जिन्हें कंपनी के विस्तार, सेवा सुधार और घाटे को कम करते हुए एयर इंडिया को मुनाफे की राह पर लाना होगा।