टाटा समूह की एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया के विमानों को लेकर एक नई चिंता सामने आई है। यूरोपियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी ने यूरोप के कई एयरपोर्ट पर एयर इंडिया के विमानों का अचानक निरीक्षण किया। इस जांच के दौरान विमानों में कई सुरक्षा संबंधी कमियां पाई गईं। रिपोर्ट के मुताबिक इन खामियों की जानकारी बाद में भारत के एविएशन रेगुलेटर डीजीसीए को भी भेजी गई, जिसके बाद मामले को गंभीरता से लिया गया।
सेफ्टी रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
जांच के दौरान पाया गया कि जनवरी महीने में एयर इंडिया के विमानों में खामियों का अनुपात बढ़कर लगभग 1.96 तक पहुंच गया था। यह आंकड़ा एयरलाइन के लिए चिंता का कारण माना जा रहा है। नियमों के अनुसार अगर यह अनुपात 2 से ऊपर चला जाता है तो इससे यूरोप में एयरलाइन के संचालन पर असर पड़ सकता है। इसलिए इस रिपोर्ट के बाद एयर इंडिया के लिए स्थिति संवेदनशील हो गई।
डीजीसीए ने बढ़ाई निगरानी
यूरोपियन एजेंसी से अलर्ट मिलने के बाद भारत के विमानन नियामक ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। डीजीसीए ने एयर इंडिया के विमानों की जांच तेज कर दी ताकि किसी भी तरह की सुरक्षा कमी को जल्द ठीक किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि समय रहते कदम उठाने का मकसद यही है कि यूरोप में एयर इंडिया की उड़ानों पर कोई असर न पड़े।
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हाल के दिनों में स्थिति में सुधार
जांच बढ़ाने के बाद एयर इंडिया के विमानों में मिलने वाली खामियों की संख्या में कुछ कमी आई है। हाल की रिपोर्ट के अनुसार यह अनुपात घटकर करीब 1.76 तक आ गया है। हालांकि यह अभी भी बेहतर स्तर से ऊपर माना जा रहा है। आम तौर पर जिन एयरलाइंस का सुरक्षा रिकॉर्ड बहुत अच्छा होता है, उनका यह अनुपात 1 से कम रहता है।
सरप्राइज निरीक्षण में कई चीजों की जांच
यूरोपियन एजेंसी की ओर से सेफ्टी एसेसमेंट प्रोग्राम के तहत विदेश की एयरलाइंस के विमानों का अचानक निरीक्षण किया जाता है। इस जांच में करीब 54 अलग-अलग सुरक्षा मानकों को देखा जाता है। इनमें इमरजेंसी एग्जिट, लाइफ जैकेट और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरणों की स्थिति की भी जांच शामिल होती है।
पुराने विमानों को माना जा रहा वजह
कुछ अधिकारियों का कहना है कि एयर इंडिया के पुराने विमान भी इन खामियों की एक वजह हो सकते हैं। टाटा समूह ने एयरलाइन को खरीदने के बाद पुराने विमानों को सुधारने के लिए बड़ा निवेश शुरू किया है। लेकिन वैश्विक सप्लाई चेन की समस्याओं के कारण कई काम तय समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप में विमानन सुरक्षा के मानक काफी सख्त माने जाते हैं।