पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव ने दुनिया भर के देशों की चिंता बढ़ा दी है। इस संघर्ष का असर तेल और गैस की सप्लाई पर भी पड़ रहा है। भारत जैसे देश के लिए यह स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। इसी वजह से भारत सरकार लगातार हालात पर नजर रख रही है और संकट से निपटने के लिए कूटनीतिक स्तर पर कदम उठा रही है।
होर्मुज रास्ते को लेकर बढ़ी अहमियत
ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। पिछले कुछ समय से यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित रही है। हालांकि खबर यह है कि भारत, चीन और रूस के जहाजों को फिलहाल इस रास्ते से गुजरने की अनुमति मिली हुई है।
भारतीय जहाजों को मिली राहत
तनावपूर्ण माहौल के बावजूद भारत के दो एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर पाए हैं। इसे भारत की कूटनीतिक सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। इन जहाजों के जरिए गैस की सप्लाई भारत तक पहुंच रही है, जिससे देश में गैस की कमी को कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है।
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ऊर्जा जरूरतें भारत के लिए बड़ी चुनौती
भारत दुनिया के सबसे बड़े एलपीजी आयातकों में शामिल है। घरेलू गैस के अलावा एलपीजी का इस्तेमाल उद्योगों में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसके साथ ही भारत अपनी करीब 90 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरतें भी विदेशों से पूरी करता है। ऐसे में अगर तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं या सप्लाई प्रभावित होती है तो इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ सकता है।
दो देशों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश
मौजूदा हालात में भारत एक संतुलित रणनीति अपनाता नजर आ रहा है। एक तरफ भारत ईरान के साथ संवाद बनाए हुए है ताकि ऊर्जा सप्लाई प्रभावित न हो। वहीं दूसरी ओर अमेरिका के साथ भी अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंध मजबूत रखने की कोशिश कर रहा है। यह संतुलन भारत की विदेश नीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों ने बताई कूटनीतिक सफलता
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत इस समय सावधानी और समझदारी के साथ कदम उठा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय टैंकरों का होर्मुज से गुजरना इस बात का संकेत है कि भारत की कूटनीति प्रभावी ढंग से काम कर रही है। इससे यह भी साफ होता है कि वैश्विक तनाव के बीच भारत अपने हितों को सुरक्षित रखने की कोशिश में लगा हुआ है।