Akash Gupta Success Story : जयपुर के एक साधारण परिवार में पले-बढ़े आकाश गुप्ता की सफलता की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। बचपन में पढ़ाई में कमजोर प्रदर्शन के बाद उन्हें परिवार की नाराजगी का सामना करना पड़ा। उसी दौर में उन्होंने समझ लिया कि जिंदगी में कुछ बड़ा हासिल करना है तो मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। यही सोच आगे चलकर उनके जीवन की सबसे बड़ी ताकत बनी और उन्होंने खुद को लगातार बेहतर बनाने पर ध्यान दिया।
13 हजार की नौकरी से शुरुआत
इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद आकाश को पहली नौकरी मिली, जहां उनकी मासिक सैलरी सिर्फ 13 हजार रुपये थी। परिवार के लिए यह खुशी की बात थी, लेकिन आकाश के मन में कुछ बड़ा करने की चाह थी। उन्होंने आगे की पढ़ाई पर ध्यान दिया और प्रबंधन की पढ़ाई के लिए तैयारी शुरू कर दी। कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने बेहतर अवसर हासिल किए और धीरे-धीरे कॉरपोरेट दुनिया में अपनी पहचान बनाई।
करोड़ की नौकरी भी नहीं रोक सकी
समय के साथ आकाश ने कई बड़ी कंपनियों में काम किया और उनका सालाना पैकेज 1 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। लेकिन इसके बावजूद उनके मन में उद्यमी बनने का सपना जिंदा था। उन्होंने अपनी पत्नी राशि अग्रवाल और परिवार के सहयोग से कारोबार शुरू करने का फैसला किया। यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि उन्हें एक सुरक्षित और बड़ी नौकरी छोड़नी पड़ी। इसके बाद उनकी नियमित आय पूरी तरह बंद हो गई, लेकिन उन्होंने जोखिम उठाने का साहस दिखाया।
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पहला कारोबार हुआ फेल
आकाश ने शुरुआत में साइकिल शेयरिंग मॉडल पर काम किया और 'मोबिसी' नाम से स्टार्टअप शुरू किया। हालांकि यह प्रयोग उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हो सका। कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें खुद मैदान में उतरना पड़ा। कई बार हालात इतने कठिन हो गए कि उन्हें लोगों तक पहुंचने के लिए खुद प्रचार करना पड़ा। आर्थिक चुनौतियां बढ़ती गईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और नए अवसर तलाशते रहे।
ऐसे हुई Zypp Electric की शुरुआत
साइकिल शेयरिंग मॉडल की सीमाओं को समझने के बाद आकाश ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर में कदम रखा। यहीं से Zypp Electric की शुरुआत हुई। कंपनी ने डिलीवरी सेक्टर के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटर उपलब्ध कराने पर फोकस किया। शुरुआती दौर में कंपनी के पास सीमित संसाधन थे, लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग ने इसे तेजी से आगे बढ़ाया। कंपनी का लक्ष्य डिलीवरी नेटवर्क को सस्ता, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाना था।
शार्क टैंक से निराशा, फिर 3000 करोड़ की उड़ान
एक समय ऐसा भी आया जब Zypp Electric को शार्क टैंक इंडिया में निवेश नहीं मिला। कंपनी ने 220 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन पर निवेश मांगा था, लेकिन कोई डील नहीं हो सकी। इसके बावजूद आकाश और उनकी टीम ने काम जारी रखा। बाद में कई बड़े निवेशकों ने कंपनी पर भरोसा जताया और करोड़ों डॉलर की फंडिंग मिली। आज Zypp Electric की वैल्यूएशन करीब 3000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। 13 हजार रुपये की नौकरी से सफर शुरू करने वाले आकाश गुप्ता की यह कहानी बताती है कि लगातार मेहनत, जोखिम उठाने का साहस और असफलता से सीखने की क्षमता किसी भी सपने को हकीकत में बदल सकती है।