Akhilesh Yadav Attacks BJP Government: संसद में जारी गतिरोध के बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने राम मंदिर के चंदे से जुड़े विवाद और फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट यानी FCRA संशोधन विधेयक पर संसद में चर्चा कराने की मांग की। अखिलेश यादव ने कहा कि संसद के सत्र के अब केवल दो दिन बचे हैं और सरकार को दोनों मुद्दों पर विपक्ष की बात सुननी चाहिए। उन्होंने राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े आरोपों को गंभीर विषय बताते हुए केंद्र से जवाब मांगा।
राम मंदिर चंदे को लेकर सरकार पर सवाल
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मामले को सामान्य विषय नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि आस्था से जुड़े इस मुद्दे पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। सपा प्रमुख ने दावा किया कि मंदिर से जुड़े चंदे के विवाद में भाजपा से जुड़े लोग भी शामिल रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से सवाल किया कि जब विपक्ष इस मामले पर चर्चा की मांग कर रहा है तो सरकार सदन में इस मुद्दे को उठाने से क्यों बच रही है।
FCRA संशोधन विधेयक पर भी घेरा
अखिलेश यादव ने FCRA संशोधन विधेयक को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून के जरिए सरकार देश में काम कर रही संस्थाओं पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश कर सकती है। सपा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि विधेयक का वास्तविक उद्देश्य क्या है और इसका असर सामाजिक संस्थाओं पर किस तरह पड़ेगा। उन्होंने संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर भी चिंता जताई।
पेपर लीक और युवाओं का मुद्दा उठाया
सपा प्रमुख ने बातचीत के दौरान पेपर लीक और युवाओं से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने कहा कि देश और उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों के कारण बड़ी संख्या में युवा प्रभावित हुए हैं। अखिलेश ने दावा किया कि कई युवा अपनी समस्याएं लेकर दिल्ली पहुंचे हैं और उन्हें सरकार से जवाब चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष इन मुद्दों को संसद में उठाना चाहता है ताकि युवाओं की समस्याओं पर चर्चा हो सके।
संसद में गतिरोध जारी
इस बीच संसद में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बना हुआ है। विपक्षी दल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर सदन में जवाब देने की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल भी इस मांग पर कायम हैं। विपक्ष का कहना है कि जब तक इन मुद्दों पर सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं मिलता, तब तक सदन में सामान्य कामकाज को लेकर सहमति बनना मुश्किल है। लगातार हंगामे के बीच संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।