
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव 8 अक्टूबर को रामपुर पहुंचेंगे। जहां पर पूर्व मंत्री आज़म खान से उनके घर पर अखिलेश मुलाकात करेंगे। वहीं इस कार्यक्रम के मुताबिक अखिलेश सुबह अमौसी एयरपोर्ट से उड़ान भरकर बरेली पहुंचेंगे और वहां से सीधे रामपुर जाएंगे। तकरीबन 11:30 बजे उनकी आज़म से मुलाकात होगी। इसके करीब एक घंटे बाद वे लखनऊ लौटेंगे। दूसरी ओर इस खबर ने रामपुर ही नहीं, पूरे प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।
जेल से बाहर आए आज़म खान
दरअसल 23 महीने बाद सीतापुर जेल से रिहा होकर आज़म खान हाल ही में रामपुर लौटे हैं। उनकी वापसी के बाद से ही सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं का जमावड़ा उनके घर पर लगातार लग रहा है। अब अखिलेश की होने वाली मुलाकात की खबर ने इसे और बड़ा सियासी रंग दे दिया है।
एक तीर से तीन शिकार की रणनीति
अखिलेश यादव की यह यात्रा केवल औपचारिक मुलाकात नहीं मानी जा रही, बल्कि इसके पीछे बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा हुआ है।
पीडीए को मजबूत करना: अखिलेश 2027 विधानसभा चुनाव में पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक (PDA) फॉर्मूले को और धार देना चाहते हैं। आज़म खान के समर्थन से वे अल्पसंख्यक वोट बैंक को आश्वस्त करना चाहेंगे कि वे पूरी तरह सपा के साथ हैं।
विरोधियों को जवाब: पिछले दिनों अफवाहें चलीं थीं कि आज़म बसपा या किसी और दल में जा सकते हैं। यहां तक कि चंद्रशेखर आज़ाद की उनसे मुलाकात ने अटकलों को और तेज़ कर दिया था लेकिन अखिलेश की इस समय पर की गई मुलाकात इन सभी कयासों पर विराम लगाने का संदेश होगी।
कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना: अखिलेश पहले ही कह चुके हैं कि सपा सरकार बनने पर आज़म पर लगे फर्जी केस वापस लिए जाएंगे। इस मुलाकात के जरिए वे कार्यकर्ताओं को यह भरोसा भी दिलाएंगे कि पार्टी अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ मजबूती से खड़ी है।
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विरोधियों को सीधा संदेश
कांशीराम परिनिर्वाण दिवस (9 अक्टूबर) से एक दिन पहले अखिलेश की यह मुलाकात तय है। यह समय भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। यह कदम साफ दर्शाता है कि अखिलेश किसी भी अफवाह को हवा नहीं लगने देना चाहते और विपक्षी दलों को करारा जवाब देने के मूड में हैं।
ट्रिपल 'ए' की राजनीति
रामपुर में इस मुलाकात को "ट्रिपल ए" कॉम्बिनेशन के रूप में देखा जा रहा है कि अखिलेश, आज़म और अल्पसंख्यक वोट बैंक। सपा की रणनीति साफ है "डबल ए" (अखिलेश और आज़म) के हाथ मिलाने से तीसरे "ए" यानी अल्पसंख्यक समुदाय को सीधा संदेश दिया जाएगा कि वे पूरी तरह सपा के पाले में हैं।
असर सिर्फ रामपुर तक सीमित नहीं
आज़म-अखिलेश की यह मुलाकात केवल रामपुर की राजनीति तक सीमित नहीं रहेगी। इसका असर पूरे पश्चिमी यूपी पर दिखना तय है। इससे आज़म खान के कद में भी इज़ाफा होगा और अल्पसंख्यक समाज के बीच उनकी पकड़ मजबूत होगी। वहीं, अखिलेश यह साबित करना चाहेंगे कि सपा का नेतृत्व आज भी उनके हाथ में मज़बूत और निर्णायक है।