लोकसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने पेपर लीक से लेकर छात्र आंदोलन और परीक्षा व्यवस्था तक कई मुद्दे उठाए। इसी दौरान अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार ने एक ‘प्रधान’ को हटाकर ‘प्रधानमंत्री’ को बचा लिया। उन्होंने युवाओं के आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि इस आंदोलन ने साबित किया है कि सरकार भी झुकती है, बस उसे झुकाने वाला चाहिए।
‘सरकार भी झुकती है, झुकाने वाला चाहिए’
अखिलेश यादव ने कहा कि वह युवाओं के आंदोलन को काफी समय से देख रहे थे। शुरुआत में जिस आंदोलन को हल्के में लिया जा रहा था, वही आगे चलकर इतना बड़ा हुआ कि सरकार को युवाओं की बात सुननी पड़ी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी ने दिखा दिया कि सरकार यह नहीं कह सकती कि वह कभी नहीं झुकती। अखिलेश ने किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले किसानों को धरने तक की अनुमति नहीं दी गई, लेकिन बाद में सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेने पड़े।
‘एक प्रधान हटाकर प्रधानमंत्री बचा लिया’
सपा अध्यक्ष ने सदन में बिना विस्तार से नाम लिए मंत्री को हटाए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि एक ‘प्रधान’ को हटाकर सरकार ने ‘प्रधानमंत्री’ को बचा लिया। अखिलेश का इशारा धर्मेंद्र प्रधान की ओर था। उन्होंने एक पूर्व मंत्री की वापसी पर हुए स्वागत का भी जिक्र किया और कहा कि उन्हें स्वागत से कोई शिकायत नहीं है। अखिलेश ने दावा किया कि युवाओं के आंदोलन के दबाव में सरकार को कई मुद्दों पर पीछे हटना पड़ा।
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‘जो चढ़ावा नहीं बचा पाए, पेपर लीक क्या बचाएंगे’
पेपर लीक के मुद्दे पर अखिलेश यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश उस राज्य में शामिल है जहां से प्रधानमंत्री चुनकर आते हैं, लेकिन वहां भी पेपर लीक की घटनाएं सामने आती रही हैं। उन्होंने तंज किया, “जो लोग चढ़ावा नहीं बचा पाए, वे पेपर लीक क्या बचाएंगे।” अखिलेश ने दावा किया कि अब तक 20 भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में अभ्यर्थियों को अदालत तक जाना पड़ा और उसके बाद परीक्षाएं रद्द हुईं।
युवाओं के साथ माता-पिता के उतरने का किया जिक्र
अखिलेश यादव ने छात्र आंदोलन को नई पीढ़ी की ताकत से जोड़ते हुए कहा कि इसकी खास बात यह रही कि युवाओं को उनके परिवारों का भी समर्थन मिला। उनके मुताबिक माता-पिता ने अपने बच्चों को आंदोलन में जाने और अपनी मांग उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी आवाज देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंची। अखिलेश ने उम्मीद जताई कि सरकार युवाओं से जुड़ी मांगों पर गंभीरता से काम करेगी।
एनटीए और आउटसोर्सिंग पर भी उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने परीक्षा व्यवस्था में आउटसोर्सिंग को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि विपक्ष को डर है कि कहीं पूरी सरकारी व्यवस्था ही आउटसोर्स न कर दी जाए। उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की व्यवस्था का जिक्र करते हुए सवाल किया कि अगर महत्वपूर्ण काम बाहरी एजेंसियों के जरिए कराया जा रहा है तो गड़बड़ी होने पर जवाबदेही किसकी होगी? अखिलेश ने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में शिक्षा और परीक्षाओं को लेकर युवाओं का भरोसा कमजोर हुआ है। लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर जारी चर्चा के बीच उनका भाषण पेपर लीक, छात्र आंदोलन और सरकार की जवाबदेही के मुद्दे पर केंद्रित रहा।