
मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर जूता फेंकने के मामले को लेकर सियासी मंचों पर भी पार्टियों ने अपनी-अपनी राय पेश करनी शुरू कर दी है. इसी मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी प्रतिक्रिया मीडिया से साझा करते हुए कहा कि कुछ लोगों के हाथ में जाकर तो जूता भी खुद को अपमानित महसूस करने लगता है. पीडीए समाज को अपमानित करने वाले इस तरह के लोग असलियत में अपने खुद के दंभ और अहंकार के मारे होते हैं.
पीडीए का मतलब है 'पीड़ित, दुखी, अपमानित'- अखिलेश
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आगे कहा कि इनकी प्रभुत्ववादी सोच नफ़रत को जन्म देती है, जो देश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए जितनी होती है, उतनी ही समाज के सबसे कमज़ोर अंतिम व्यक्ति के लिए भी होती है. ऐसे लोग वर्चस्ववाद की बीमारी से बुरी तरह से ग्रसित होते हैं. हम इसी वजह से कहते हैं कि पीडीए का मतलब है 'पीड़ित, दुखी, अपमानित'.
पीडीए समाज अब और नहीं सहेगा अपमान- सपा प्रमुख
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि इस तरह के लोगों को पीडीए समाज की उदारता और भलमनसाहत 5000 सालों से माफ़ करती आई है, लेकिन इस हद तक अपमान के बाद पीडीए समाज अब और नहीं सहेगा. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर हमला करते हुए कहा कि भाजपा और उसके संगी-साथी अपनी सत्ता के अंतिम दौर में चल रहे हैं, क्योंकि उनकी भ्रष्ट चुनावी साज़िश का भंडाफोड़ हो चुका है, वो अब कभी नहीं जीतेंगे. इसीलिए हताश होकर वो ऐसे कुकृत्य कर रहे हैं. भाजपाई इस बार जाएंगे तो फिर कभी नहीं आएंगे क्योंकि जब आबादी का 90 फीसदी हिस्सा अपने हक़ अधिकार के लिए जाग गया है, तो 10 फीसदी का गुरूर और सिंहासन अब और नहीं टिक सकेगा.
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'अपमान बनाम सम्मान' के संघर्ष का दौर'
इतना ही नहीं अखिलेश यादव ने कहा कि भारत के सामाजिक-राजनीतिक इतिहास में ये दौर 'अपमान बनाम सम्मान' के संघर्ष का दौर है. पीडीए अपने स्वाभिमान और स्वमान का ये अंतिम संघर्ष निर्णायक रूप से जीत कर ही रहेगा.