
उत्तर प्रदेश की राजनीति हमेशा अचानक मोड़ लेती है हाल ही में शिवपाल यादव के बयान ने बीजेपी खेमे को हिलाया ही था कि अब अखिलेश यादव ने ऐसा दांव खेला है जिससे योगी सरकार और बीजेपी की टेंशन और बढ़ सकती है. जिसकी वजह जयंत चौधरी का एनडीए में शामिल होना है, दरअसल जाट वोटों का बड़ा हिस्सा बीजेपी की ओर जा सकता है, लेकिन अखिलेश ने एक खास चाल चली है, खबर है कि अखिलेश यादव गुर्जर वोट बैंक से पूरा करने की रणनीति बना रहे हैं.
गुर्जर वोटों पर सपा का फोकस
रिपोर्ट्स की मानें तो वेस्ट यूपी की राजनीति में जाट समुदाय की हिस्सेदारी 3-4% है, जो कई सीटों पर निर्णायक साबित होती है लेकिन यहां गुर्जरों की आबादी 5-6% है और मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, बागपत, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर और बुलंदशहर जैसे जिलों में उनका गहरा प्रभाव है. अगर गुर्जर समाज सपा के साथ खड़ा हो गया, तो जाट वोटों का नुकसान आसानी से भरपाई हो जाएगा. यही कारण है कि अखिलेश यादव अब गुर्जरों को साधने पर पूरा जोर लगा रहे हैं.
चौपालों और रैलियों से सीधा संपर्क
खबर है कि अखिलेश यादव ने तय किया है कि वो मैदान में उतरकर छोटी-छोटी चौपालों और रैलियों के जरिए सीधे गुर्जर समाज से जुड़ेंगे. इस मिशन के तहत 34 जिलों की 132 विधानसभा सीटों पर चौपालें होंगी, खासकर उन जगहों पर जहां गुर्जरों की संख्या ज्यादा है. इसकी कमान अखिलेश ने अपने भरोसेमंद नेता और प्रवक्ता राजकुमार भाटी को दी है. नवंबर में ग्रेटर नोएडा में अखिलेश की बड़ी रैली होने वाली है, जो इस अभियान का सबसे अहम हिस्सा मानी जा रही है.
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राजा मिहिर भोज का सहारा
सपा ने गुर्जर समाज को जोड़ने के लिए ऐतिहासिक नायक राजा मिहिर भोज की विरासत को भी सामने रखा है. हाल ही में अखिलेश यादव ने लखनऊ में 60 से ज्यादा गुर्जर संगठनों से मुलाकात की और उनकी सामाजिक-आर्थिक समस्याओं को समझने का भरोसा दिया. साथ ही मिहिर भोज की वीरता और योगदान को आगे बढ़ाकर भावनात्मक जुड़ाव बनाने की रणनीति अपनाई गई. इससे गुर्जरों को ये संदेश देने की कोशिश हो रही है कि उनकी पहचान और हिस्सेदारी की लड़ाई सपा ही लड़ सकती है.
2024 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव की पीडीए रणनीति (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) ने शानदार असर दिखाया था. सपा-कांग्रेस गठबंधन ने 43 सीटें जीतीं, जिसमें अकेले सपा को 37 सीटें मिलीं. इस जीत में गैर-यादव ओबीसी और दलित समुदाय का बड़ा योगदान था. अब अखिलेश इस फार्मूले को और मजबूत करने के लिए गुर्जर समाज को इसमें शामिल करना चाहते हैं.
बीजेपी के लिए नई चुनौती
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर गुर्जर वोट बैंक सपा के साथ चला गया तो वेस्ट यूपी में बीजेपी की मुश्किलें दोगुनी हो जाएंगी. जयंत चौधरी और बीजेपी का गठबंधन जाट वोटों पर आधारित है, लेकिन सपा गुर्जरों से उसकी काट निकाल सकती है. इससे न सिर्फ बीजेपी का चुनावी गणित बिगड़ेगा, बल्कि जयंत चौधरी के असर पर भी सीधी चोट होगी. अब सवाल यही है क्या अखिलेश का ये दांव सही निशाने पर बैठेगा? या फिर बीजेपी इस नए खेल का जवाब ढूंढ लेगी?