इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि अगर कोई शादीशुदा पुरुष किसी बालिग महिला के साथ उसकी मर्जी से रह रहा है, तो इसे अपराध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने साफ कहा कि सामाजिक या नैतिक मान्यताएं कानून का आधार नहीं बन सकतीं। जब तक किसी कानून का उल्लंघन नहीं होता, तब तक ऐसे मामलों में आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती।
गिरफ्तारी पर रोक, पुलिस को दिए सख्त निर्देश
यह फैसला जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिविजन बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता जोड़े की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि उन्हें परेशान न किया जाए। साथ ही कोर्ट ने महिला के परिवार को भी चेतावनी दी कि वे किसी भी तरह से जोड़े को नुकसान न पहुंचाएं और उनसे संपर्क करने की कोशिश भी न करें।
SP को सौंपी गई सुरक्षा की जिम्मेदारी
कोर्ट ने इस मामले में शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि जोड़े की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस का कर्तव्य है। इसके साथ ही आदेश दिया गया कि इस फैसले की जानकारी 24 घंटे के भीतर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जाए। अगली सुनवाई 8 अप्रैल को तय की गई है।
FIR की पृष्ठभूमि और कोर्ट में दलीलें
यह मामला तब सामने आया जब महिला की मां ने आरोप लगाया कि उसकी बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया था, लेकिन कोर्ट में जोड़े ने कहा कि वे दोनों बालिग हैं और अपनी मर्जी से साथ रह रहे हैं। विरोधी पक्ष ने दलील दी कि पुरुष पहले से शादीशुदा है, इसलिए यह संबंध गलत है, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
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ऑनर किलिंग की आशंका पर कोर्ट सख्त
महिला ने कोर्ट को बताया कि उसके परिवार से जान का खतरा है और ऑनर किलिंग की धमकी मिल रही है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई कि पुलिस ने पहले इस शिकायत पर कार्रवाई क्यों नहीं की। कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसे मामलों में सुरक्षा देना राज्य की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कानूनी बनाम सामाजिक सोच का फर्क
इस फैसले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सहमति का सम्मान कानून की प्राथमिकता है। कोर्ट ने कहा कि समाज की सोच अलग हो सकती है, लेकिन कानून केवल उसी आधार पर काम करेगा जो विधिक रूप से सही है। यह फैसला लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।