America Bottle Recycling System : भारत की गलियों में आपने कबाड़ी वालों को अक्सर “लोहा-टीपा, रद्दी-पेपर” की आवाज लगाते सुना होगा। घरों से पुराने अखबार, प्लास्टिक और कबाड़ इकट्ठा करके वे अपना काम करते हैं। लेकिन अमेरिका में कबाड़ इकट्ठा करने का तरीका थोड़ा अलग है। यहां कुछ लोग खाली बोतलें और कैन जमा करके पैसे कमाते हैं। खास बात यह है कि इसके लिए उन्हें किसी दुकान पर जाकर मोलभाव करने की जरूरत नहीं पड़ती। अमेरिका में रहने वाली भारतीय महिला स्वाति अग्रवाल गुप्ता ने एक वीडियो के जरिए इस तरीके को दिखाया है, जो सोशल मीडिया पर चर्चा में है।
अमेरिका में कबाड़ी कैसे करते हैं काम
स्वाति के मुताबिक, अमेरिका में बोतलें और कैन जमा करके पैसे कमाने वाले लोगों को आम तौर पर ‘कैनर्स’ कहा जाता है। ये लोग सड़कों और कचरे में फेंकी गई खाली बोतलें इकट्ठा करते हैं। इसके बाद उन्हें तय व्यवस्था के तहत जमा करके पैसे लेते हैं। भारत की तरह हर बार कबाड़ तौलने या उसकी कीमत को लेकर मोलभाव करने की जरूरत नहीं होती। हालांकि, यह सुविधा हर जगह एक जैसी नहीं है और वहां के स्थानीय नियमों पर निर्भर करती है।
खाली बोतल के बदले मिलते हैं पैसे
इस पूरे तरीके की सबसे खास बात खाली बोतलों की तय कीमत है। स्वाति ने बताया कि न्यूयॉर्क में कुछ बोतलों पर 5 सेंट यानी करीब 0.05 डॉलर की वापसी कीमत मिलती है। इसका मतलब है कि जिन खाली बोतलों को कई लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं, उन्हें जमा करके कमाई की जा सकती है। हालांकि, यह कीमत हर बोतल पर लागू नहीं होती। इसके लिए बोतल का तय योजना में शामिल होना जरूरी है।
मशीन से मिलता है पैसे लेने का रास्ता
अमेरिका में कुछ सुपरमार्केट के पास रिवर्स वेंडिंग मशीन लगी होती हैं। इनमें खाली बोतलें और कैन डालने पर मशीन उनकी जांच करती है। पात्र बोतलों के बदले एक पर्ची मिलती है, जिसे तय काउंटर पर देकर पैसे लिए जा सकते हैं। इससे बोतलें जमा करने और उनकी कीमत पाने का काम आसान हो जाता है। इस तरीके से प्लास्टिक और दूसरी चीजों को दोबारा इस्तेमाल के लिए जमा करने में भी मदद मिलती है।
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भारतीय कबाड़ी से क्यों हो रही तुलना
स्वाति का वीडियो सामने आने के बाद लोग अमेरिका और भारत के कबाड़ी के तरीकों की तुलना कर रहे हैं। कुछ लोगों को अमेरिका की मशीनों वाला तरीका पसंद आ रहा है, जबकि कई लोग भारतीय कबाड़ी की तारीफ कर रहे हैं, जो घर तक आकर पुराना सामान खरीद लेते हैं। भारत में भी कबाड़ इकट्ठा करने का काम रीसाइक्लिंग व्यवस्था का अहम हिस्सा है। दोनों जगह काम करने का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन बेकार समझी जाने वाली चीजों को दोबारा काम में लाना ही इस काम की असली खासियत है।