
Nuclear Test After 33 years: दुनिया में पहले से चल रहे युद्ध और तनाव के बीच अब परमाणु हथियारों की नई होड़ शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 30 अक्टूबर को घोषणा की कि वह 33 साल बाद फिर से परमाणु परीक्षण शुरू करेंगे। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर बताया कि उन्होंने पेंटागन को इस दिशा में काम शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं। उनका कहना है कि यह कदम रूस और चीन की हालिया परमाणु गतिविधियों के जवाब में उठाया जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल परमाणु हथियारों की प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगा बल्कि दुनिया को एक बड़े युद्ध के कगार पर भी ला सकता है।
रूस और चीन में बढ़ी बेचैनी
ट्रंप के इस ऐलान के बाद रूस, चीन और ईरान में हड़कंप मच गया है। रूस ने इसे “वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा” बताते हुए चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने असली विस्फोट परीक्षण किया तो वह जवाबी कदम उठाएगा। चीन ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन उसके परमाणु भंडार के विस्तार को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। वहीं अमेरिकी सांसदों और विश्लेषकों का कहना है कि यह फैसला 1992 के मोरेटोरियम और 1996 की परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (CTBT) की भावना के खिलाफ है, जिससे दशकों से कायम संतुलन टूट सकता है।
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नई परमाणु होड़ का खतरा बढ़ा
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और रूस के पास मिलकर दुनिया के 90 प्रतिशत परमाणु हथियार हैं — रूस के पास करीब 5,580 और अमेरिका के पास लगभग 5,044। चीन 2030 तक 1,000 न्यूक्लियर हथियारों के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि अमेरिका ने वाकई परीक्षण शुरू किए, तो उत्तर कोरिया और ईरान जैसे देश भी इसका अनुसरण कर सकते हैं। इससे न केवल हथियारों की होड़ तेज होगी, बल्कि परमाणु युद्ध का जोखिम भी कई गुना बढ़ जाएगा। संयुक्त राष्ट्र और SIPRI की हालिया रिपोर्टें पहले ही संकेत दे चुकी हैं कि वैश्विक परमाणु तनाव एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है।