US-Iran Tension: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा कदम उठाया है। ट्रंप ने ईरान के खिलाफ राष्ट्रीय आपातकाल को और मजबूत करते हुए नया कार्यकारी आदेश जारी किया है। इसके तहत जो भी देश ईरान से सीधे या परोक्ष रूप से व्यापार करेगा, उस पर अमेरिका टैरिफ लगा सकता है। इस फैसले को अमेरिका ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और आर्थिक हितों की रक्षा से जोड़कर देखा है। इससे खामेनेई का समर्थन करने वाले देशों को कड़ा झटका लगा है और वैश्विक स्तर पर हलचल तेज हो गई है।
ईरान को आर्थिक रूप से घेरने की कोशिश
नए आदेश का मुख्य उद्देश्य ईरान के आर्थिक नेटवर्क को कमजोर करना है। अमेरिका का मानना है कि ईरान अपने व्यापारिक लाभ का इस्तेमाल परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइल विकास और क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने में करता है। इसी वजह से इस आदेश के जरिए ईरान की आय के स्रोतों पर सीधा प्रहार करने की रणनीति अपनाई गई है।
किन कानूनों के तहत जारी हुआ आदेश
यह कार्यकारी आदेश International Emergency Economic Powers Act और National Emergencies Act के तहत जारी किया गया है। इन कानूनों के जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार मिलता है कि वे राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में विदेशी व्यापार पर सख्त पाबंदियां लगा सकें। ईरान को अमेरिका ने अपनी सुरक्षा के लिए असाधारण खतरा बताया है।
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ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति
डोनाल्ड ट्रंप पहले भी ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते रहे हैं। 2018 में उन्होंने ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर कर दिया था और ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति लागू की थी। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकवादी संगठन घोषित किया जा चुका है। नया आदेश इसी नीति का विस्तार माना जा रहा है।
आदेश में बदलाव की गुंजाइश
व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि अगर हालात बदलते हैं या संबंधित देश अमेरिका के साथ सहयोग करते हैं, तो इस आदेश में संशोधन किया जा सकता है। हालांकि अगर किसी देश की ओर से जवाबी कार्रवाई होती है, तो अमेरिका और सख्त कदम भी उठा सकता है। यह साफ संकेत है कि आने वाले समय में अमेरिका-ईरान तनाव और गहरा सकता है।