India-US trade deal: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील से पहले अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट का फ्रेमवर्क सामने आया है। इसके तहत आज से भारत पर लगने वाला टैरिफ घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है। पहले यह दर 50 फीसदी तक थी। साथ ही रूस से तेल खरीदने को लेकर लगाया गया अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ भी हटा दिया गया है। इस समझौते को दोनों देशों के बीच व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
30 ट्रिलियन डॉलर का अमेरिकी बाजार खुलेगा
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, इस फ्रेमवर्क के लागू होने से भारत के लिए अमेरिका का करीब 30 ट्रिलियन डॉलर का विशाल बाजार खुलेगा। इससे टेक्सटाइल, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक, रबर उत्पाद, जैविक रसायन, हस्तशिल्प और चुनिंदा मशीनरी सेक्टर को बड़ा फायदा मिलेगा। भारतीय निर्यातकों के लिए यह एक ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है।
500 अरब डॉलर की खरीद पर सहमति
डील के तहत भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से करीब 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने पर सहमति जताई है। इसमें कच्चा तेल, ऊर्जा उत्पाद, विमान, फाइटर जेट, बहुमूल्य धातुएं, तकनीकी उपकरण और कोकिंग कोयला शामिल हैं। इसके अलावा जीपीयू और डेटा सेंटर से जुड़े उत्पादों के व्यापार को भी बढ़ावा देने की बात कही गई है।
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किस सेक्टर को राहत, किसे नहीं
अमेरिका ने भारत के जेनेरिक फार्मा, रत्न-आभूषण और विमान पुर्जों जैसे चुनिंदा उत्पादों पर टैरिफ हटाने का फैसला किया है। वहीं भारत ने कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर कोई बड़ी रियायत नहीं दी है। मक्का, गेहूं, चावल, दूध, पनीर, मांस, इथेनॉल और तंबाकू जैसे उत्पाद इस दायरे से बाहर रखे गए हैं।
MSME और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
इस ट्रेड फ्रेमवर्क से छोटे और मझोले उद्योगों, किसानों और मछुआरों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं और युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।