Amid the LPG crisis: वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच केंद्र सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर भारत पर भी पड़ा है। इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने पेट्रोल पंपों के जरिए केरोसिन (मिट्टी का तेल) की आपूर्ति की अनुमति देने का फैसला किया है। इसके लिए नियमों में अस्थायी ढील दी गई है, ताकि जरूरतमंद परिवारों को ईंधन की कमी का सामना न करना पड़े।
नियमों में अस्थायी छूट का ऐलान
सरकार ने पेट्रोलियम अधिनियम, 1934 और पेट्रोलियम नियम, 2002 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुछ नियमों में छूट दी है। इस फैसले का उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत केरोसिन की उपलब्धता को आसान बनाना है। अधिसूचना के अनुसार, मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे यह कदम जरूरी हो गया।
पेट्रोल पंपों पर भंडारण की अनुमति
नए नियमों के तहत चयनित जिलों में सरकारी तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों को अधिकतम 5,000 लीटर तक केरोसिन भंडारण की अनुमति दी गई है। इससे केरोसिन की सप्लाई चेन मजबूत होगी और दूर-दराज के इलाकों में भी इसकी पहुंच आसान हो सकेगी। हालांकि, सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य रहेगा।
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टैंक वाहनों को राहत
सरकार ने केरोसिन वितरण से जुड़े डीलरों और एजेंटों को लाइसेंस संबंधी नियमों में भी छूट दी है। अब उन्हें अलग से लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा, लाइसेंस प्राप्त टैंक वाहनों को भी अतिरिक्त अनुमति से राहत दी गई है। यह व्यवस्था केवल खाना पकाने और रोशनी के लिए केरोसिन वितरण तक सीमित रहेगी।
21 राज्यों में लागू
यह फैसला दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा और पंजाब समेत कुल 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगा। अधिसूचना तुरंत प्रभाव से लागू कर दी गई है और यह 60 दिनों तक या अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से खासतौर पर गरीब और जरूरतमंद परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।