क्रिकेट की दुनिया में अक्सर टी20 को युवाओं का खेल माना जाता है, लेकिन 2009 में एक दिग्गज ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया। भारत के महान स्पिनर अनिल कुंबले ने रिटायरमेंट के बाद आईपीएल में ऐसा कारनामा किया, जिसे आज तक कोई दोहरा नहीं पाया है।
फाइनल में हारकर भी बने हीरो
आईपीएल 2009 के फाइनल में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और डेक्कन चार्जर्स के बीच मुकाबला खेला गया। इस मैच में कुंबले ने कप्तान के तौर पर शानदार गेंदबाजी करते हुए 16 रन देकर 4 विकेट लिए। उन्होंने एडम गिलक्रिस्ट, एंड्रयू साइमंड्स, रोहित शर्मा और वेणुगोपाल राव जैसे बड़े बल्लेबाजों को आउट किया। हालांकि आरसीबी यह मैच 6 रन से हार गई, लेकिन कुंबले को ‘मैन ऑफ द मैच’ चुना गया। वह आईपीएल इतिहास के पहले ऐसे कप्तान बने, जिनकी टीम फाइनल हारी, फिर भी उन्हें यह सम्मान मिला।
टी20 में टेस्ट जैसी रणनीति
कुंबले की खासियत उनकी सटीक लाइन-लेंथ और आक्रामक सोच थी। उन्होंने टी20 में भी टेस्ट क्रिकेट की तरह फील्ड सेट की और बल्लेबाजों को रन रोकने के बजाय विकेट लेने के लिए उकसाया। उनकी लेग स्पिन और फ्लिपर ने बल्लेबाजों को टिकने का मौका ही नहीं दिया।
5 विकेट का ऐतिहासिक कारनामा
उसी सीजन में कुंबले ने राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ 5 रन देकर 5 विकेट लेकर इतिहास रच दिया। यह आईपीएल के सबसे किफायती और घातक स्पेल में से एक माना जाता है। उस समय 38 साल की उम्र में ऐसा प्रदर्शन करना अपने आप में एक रिकॉर्ड था।
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उम्र को दी चुनौती
कुंबले ने साबित किया कि अनुभव और जज्बा उम्र से बड़ा होता है। उन्होंने आरसीबी को उस सीजन में निचले पायदान से उठाकर फाइनल तक पहुंचाया। उनका प्रदर्शन आज भी क्रिकेट प्रेमियों के लिए प्रेरणा है और यह दिखाता है कि असली खिलाड़ी रिटायरमेंट के बाद भी अपना जादू बिखेर सकते हैं।
आज तक कायम है रिकॉर्ड
आईपीएल के इतने सालों के इतिहास में अब तक कोई भी कप्तान फाइनल हारने के बावजूद ‘मैन ऑफ द मैच’ नहीं बन पाया है। यही वजह है कि कुंबले का यह रिकॉर्ड आज भी अनोखा और यादगार बना हुआ है।