दो दिनों तक चली लंबी बहस और विपक्ष के जोरदार हंगामे के बीच लोकसभा ने एंटी पेपर लीक बिल को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस विधेयक पर करीब 10 घंटे तक चर्चा हुई। चर्चा का जवाब केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दिया, जिसके बाद सदन में संशोधनों सहित बिल को मंजूरी मिल गई। इस दौरान विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साधता रहा।
जितेंद्र सिंह ने विपक्ष पर साधा निशाना
बिल पर जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा की उम्मीद थी, लेकिन इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर बिना तथ्यों के बयान देने का आरोप लगाया। गृह मंत्री को लेकर दिए गए बयान पर उन्होंने कहा कि गोली चलाने का आदेश मजिस्ट्रेट देता है, गृह मंत्री नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि जिस घटना का जिक्र किया जा रहा है, उसमें गोली चली ही नहीं थी।
राहुल गांधी ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
राहुल गांधी ने सदन में परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश का परीक्षा तंत्र युवाओं के साथ अन्याय कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि या तो गृह मंत्री को कथित फायरिंग की जानकारी नहीं थी, जो प्रशासनिक विफलता है, या फिर जानकारी थी तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली को लेकर भी सरकार पर तीखा हमला बोला।
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सरकार ने गिनाईं अपनी उपलब्धियां
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विपक्ष केवल आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में कई सुधार किए हैं। उन्होंने दावा किया कि उच्च शिक्षा के अवसरों में करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। साथ ही उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामलों में कई एफआईआर दर्ज की गईं और कार्रवाई भी की गई है। सरकार के अनुसार, नया कानून परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
राज्यसभा में भी रहा हंगामा
उधर राज्यसभा की कार्यवाही भी विपक्ष के विरोध के बीच शुरू हुई। विपक्ष ने सीपीएम के दिल्ली कार्यालय पर हुई कार्रवाई का मुद्दा उठाया और इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर सवाल खड़े किए, जबकि सदन के नेता जेपी नड्डा ने कहा कि कानून के तहत कार्रवाई होना सामान्य प्रक्रिया है और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
अब राज्यसभा की मंजूरी का इंतजार
लोकसभा से पारित होने के बाद अब एंटी पेपर लीक बिल को कानून बनने के लिए राज्यसभा की मंजूरी और उसके बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति की जरूरत होगी। सरकार का कहना है कि इस कानून से पेपर लीक, परीक्षा में धांधली और संगठित नकल जैसे मामलों पर सख्त कार्रवाई का रास्ता मजबूत होगा, जबकि विपक्ष का आरोप है कि केवल कानून बनाने से नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार से ही छात्रों की समस्याओं का समाधान होगा।