Cow as National Animal: अरशद मदनी ने केंद्र सरकार से गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग करते हुए कहा है कि इससे लंबे समय से चल रहा विवाद हमेशा के लिए खत्म हो सकता है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से जारी बयान में उन्होंने कहा कि गाय के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग और हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कानून बनाया जाना चाहिए।
सरकार से पूछा राजनीतिक मजबूरी का सवाल
मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि जब देश की बहुसंख्यक आबादी गाय को पवित्र मानती है और उसे मां का दर्जा देती है, तब सरकार उसे राष्ट्रीय पशु घोषित करने से क्यों बच रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी कौन सी राजनीतिक मजबूरी है, जिसके कारण इस मुद्दे पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जा रहा।
गाय के नाम पर होती है राजनीति
मदनी ने आरोप लगाया कि कुछ लोग गाय के प्रति श्रद्धा से अधिक राजनीति में रुचि रखते हैं। उनके अनुसार चुनावी माहौल में गाय जैसे भावनात्मक मुद्दों को जानबूझकर उछाला जाता है, ताकि समाज में ध्रुवीकरण हो और राजनीतिक फायदा लिया जा सके। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति का असर सामाजिक सौहार्द पर भी पड़ता है।
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मुस्लिम समुदाय को नहीं होगी आपत्ति
जमीयत प्रमुख ने कहा कि यदि सरकार गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करती है तो मुस्लिम समुदाय को इससे कोई आपत्ति नहीं होगी। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम समाज इस फैसले का स्वागत करेगा, क्योंकि इससे गाय के नाम पर होने वाली हिंसा और मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर रोक लग सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि कई साधु-संत भी लंबे समय से यही मांग उठा रहे हैं।
समान कानून लागू करने की मांग
अरशद मदनी ने कहा कि गाय से जुड़े मामलों को लेकर पूरे देश में एक समान कानून होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार गोकशी या पशु तस्करी के नाम पर निर्दोष लोगों को निशाना बनाया जाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि उनका संगठन हर साल बकरीद के दौरान मुसलमानों से प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी नहीं करने की अपील करता है, ताकि किसी भी धर्म की भावनाओं को ठेस न पहुंचे।