
Delhi to reduce pollution: दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। इसे कम करने के लिए प्रशासन ने अब कृत्रिम बारिश यानी क्लाउड सीडिंग का सहारा लेने का फैसला किया है। इस पहल में सेना का विशेष विमान कानपुर से मेरठ के लिए रवाना हो चुका है। इसका उद्देश्य राजधानी में हवा की गुणवत्ता सुधारना और लोगों को प्रदूषण से राहत देना है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और केवल सफल होने पर ही सार्वजनिक रूप से जानकारी दी जाएगी।
कृत्रिम बारिश की प्रक्रिया
कृत्रिम बारिश के लिए सेना विशेष तकनीक का उपयोग कर रही है, जिसे पाइरोटेक्निक फ्लेयर्स कहते हैं। विमान की विंग्स के नीचे इन फ्लेयर्स को बादलों में छोड़ा जाता है। यह रसायन बादलों में संघनन बढ़ाते हैं और वर्षा को प्रेरित करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक तब सबसे प्रभावी होती है जब बादलों की स्थिति अनुकूल हो। अगले 72 घंटों में मौसम और बादलों की स्थिति के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रभाव और उम्मीद
इस क्लाउड सीडिंग का असर लगभग 100 किलोमीटर के दायरे में देखने को मिल सकता है। इसके पूरा होने के बाद दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार की संभावना है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम प्रदूषण से राहत देने में मददगार साबित हो सकता है। राजधानीवासियों के लिए यह अच्छी खबर है कि प्रशासन और सेना मिलकर प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए त्वरित और आधुनिक उपाय अपना रहे हैं।