आशुतोष माहिदा की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं। महामारी के दौरान उनके पिता चिराग माहिदा, जो एक कोरियोग्राफर थे, अचानक बेरोजगार हो गए। घर चलाने का संकट इतना बड़ा था कि पिता को सड़क किनारे सब्जी बेचनी पड़ी। इस मुश्किल समय में आशुतोष भी उनके साथ सब्जी तौलते नजर आते थे। लेकिन इन परिस्थितियों ने उनके क्रिकेट के सपने को कमजोर नहीं किया। पिता हमेशा उन्हें प्रेरित करते रहे कि वे खेल न छोड़ें। इसी हिम्मत और जिद ने आशुतोष को सब्जी की दुकान से उठाकर BCCI की U-19 इंडिया A टीम तक पहुंचा दिया।
जब चमका किस्मत का सितारा
2024 आशुतोष के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। विजय मर्चेंट ट्रॉफी और कूच बिहार ट्रॉफी में उन्होंने सिर्फ पांच मैच खेलकर 16 विकेट चटकाए। उनकी गति और स्विंग देखकर सेलेक्टर्स भी चौंक गए और उनकी मेहनत ने उन्हें U-19 ट्राई सीरीज की इंडिया A टीम में जगह दिलाई। इसी प्रदर्शन ने उन्हें क्रिकेट जगत की नजरों में ला दिया। यह वही पल था जब सड़क किनारे सब्जी बेचने वाला लड़का भारतीय क्रिकेट का उभरता सितारा बन चुका था।
इंटरनेशनल स्तर पर पहला इम्तिहान
17 नवंबर को इंडिया A बनाम इंडिया B मुकाबले में आशुतोष ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर कदम रखा और पहले ही मैच में सबको प्रभावित कर दिया। उन्होंने 9 ओवर में सिर्फ 33 रन दिए और दो महत्वपूर्ण विकेट झटके। उनकी लाइन-लेंथ और तेज रफ्तार देखकर कोच, कमेंटेटर और साथी खिलाड़ी सभी हैरान रह गए। इस मैच के बाद सोशल मीडिया पर उनकी तारीफों की बाढ़ आ गई और उम्मीदों का नया दरवाज़ा खुल गया।
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गंभीर और लक्ष्मण की नजर में आया नया स्टार
मिल रही जानकारी के अनुसार गौतम गंभीर, वीवीएस लक्ष्मण और NCA के कई कोच आशुतोष पर खास नजर रख रहे हैं। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अगर उन्होंने इसी तरह मेहनत जारी रखी तो भारतीय तेज गेंदबाजी को एक नया स्टार मिल सकता है। आशुतोष के गांव में खुशी का माहौल है और लोग गर्व से कहते हैं कि यह लड़का एक दिन इंडिया को मैच जिताएगा। माता-पिता के लिए यह सबसे बड़ा इनाम है, क्योंकि उन्होंने कठिन हालात झेलते हुए बेटे के सपने को ज़िंदा रखा। आशुतोष की कहानी बताती है कि संघर्ष कैसे इंसान को ऊंचाइयों तक पहुंचा देता है।