UGC NET RE-EXAM: यूजीसी नेट परीक्षा की आंसर-की जारी होने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने तीन मुख्य विषयों इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी की परीक्षा रद्द कर दी है। इस फैसले के बाद से अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश है और सोशल मीडिया पर एनटीएन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि इस फैसले के बाद उन्हें फिर से दूसरे शहर में अपने खर्च पर जाना होगा और एनटीए की गलती का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
एग्जाम फीस माफ
एनटीए की तरफ से ये साफ किया गया है कि री-एग्जाम के लिए कोई फीस नहीं लगेगी। लेकिन परीक्षा केंद्र तक पहुंचने और रहने खान के खर्च पर स्थिति स्पष्ट नहीं की है। कई अभ्यर्थियों का कहना है कि वे 400 किलोमीटर दूर तक ट्रेन टिकट, होटल और खान पर हजारों रुपये खर्च करके पहुंचे थे। अब दोबारा परीक्षा देने के लिए उन्हें यही आर्थिक बोझ फिर उठाना पड़ेगा।
री-एग्जाम के लिए केवल 20 दिन का दिया समय
छात्रों का कहना है कि एनटीए 50 दिनों तक इस मामले पर चुप रहा और जब आंसर-की जारी हुई तो अचानक परीक्षा रद्द कर दिया गया। छात्रों के अनुसार री-एग्जाम के लिए केवल 20 दिन का समय दिया गया है, जबकि तैयारी के लिए कम से कम एक महीने का समय मिलना चाहिए था।
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होम सिटी सेंटर चुनने की मांग
कुछ अभ्यर्थियों की मांग है कि एनटीए यात्रा का पूरा खर्च उठाए या अभ्यर्थियों को उनकी होम सिटी में सेंटर चुनने का विकल्प दे। उम्मीद की जा रही है कि CUET और NEET की तर्ज पर एनटीए जल्द ही अभ्यर्थियों को नजदीकी शहर का एग्जाम सेंटर चुनने का मौका दे सकता है। फिलहाल एजेंसी ने ऐसा कोई ऐलान नहीं किया है।
'छात्रों के साथ धोखा'
बता दें कि नीट पेपर लीक के बाद देशभर में छात्रों ने आंदोलन किया था। इस दौरान विपक्ष भी लगातार सरकार पर हमलावर रहा। वहीं अब नेट पेपर रद्द होने के बाद भी विपक्ष हमलावर है। विपक्ष का कहना है कि ये छात्रों के साथ धोखा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी का कहना है कि एजेंसी की लापरवाहियों और गलतियों की सजा हमेशा निर्दोष छात्रों को भुगतनी पड़ती है।