देश में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार नई योजनाएं सामने आ रही हैं। बिहार के बाद अब असम सरकार ने भी महिलाओं के लिए बड़ी पहल की है। विधानसभा चुनाव से पहले शुरू की गई इस योजना के तहत महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता दी जा रही है। सरकार का मकसद है कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं खुद का रोजगार शुरू कर सकें और परिवार की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएं। इस योजना से लाखों महिलाओं को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
योजना की शुरुआत क्यों हुई
असम सरकार का मानना है कि जब तक महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत नहीं किया जाएगा तब तक समाज का विकास अधूरा रहेगा। इसी सोच के साथ महिला स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए यह योजना शुरू की गई है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को शुरुआती पूंजी दी जा रही है ताकि वे छोटे कारोबार की शुरुआत कर सकें। सरकार का दावा है कि इससे गांवों में रोजगार बढ़ेगा और पलायन भी कम होगा।
कितनी राशि दी जा रही है
इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूह की महिला सदस्यों को पहली किश्त के रूप में दस हजार रुपये दिए जा रहे हैं। यह राशि सीधे महिला के बैंक खाते में भेजी जाती है। सरकार के अनुसार अब तक पंद्रह लाख से अधिक महिलाएं इस सहायता का लाभ ले चुकी हैं। पहले योजना का लक्ष्य बत्तीस लाख महिलाओं तक पहुंचना था लेकिन अब इसे बढ़ाकर चालीस लाख कर दिया गया है।
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आगे और क्या मिलेगा
सरकार ने इस योजना को सिर्फ दस हजार रुपये तक सीमित नहीं रखा है। यदि महिला इस राशि का सही उपयोग कर छोटा काम शुरू करती है तो आगे कम ब्याज पर पच्चीस हजार रुपये का ऋण दिया जाता है। व्यवसाय सफल रहने पर तीसरे चरण में पचास हजार रुपये तक की अतिरिक्त मदद भी मिल सकती है। इस तरह सरकार महिलाओं को चरणबद्ध तरीके से मजबूत बनाने की कोशिश कर रही है।
आवेदन करने की प्रक्रिया
इस योजना का लाभ लेने के लिए महिला का किसी मान्यता प्राप्त स्वयं सहायता समूह से जुड़ा होना जरूरी है। सबसे पहले अपने गांव या क्षेत्र के पंचायत या खंड स्तर पर चल रहे समूह से संपर्क करना होगा। वहां आधार कार्ड बैंक खाता निवास प्रमाण पत्र और समूह से जुड़ाव से संबंधित कागजात जमा करने होते हैं। सत्यापन पूरा होने के बाद सहायता राशि खाते में भेज दी जाती है।
योजना से क्या बदलेगा
सरकार का लक्ष्य है कि इस योजना के जरिए लाखों महिलाओं को लखपति बनाया जाए। आंकड़ों के अनुसार पहले ही आठ लाख महिलाएं इस दिशा में आगे बढ़ चुकी हैं। महिलाओं के हाथ में पैसा आने से न सिर्फ उनका आत्मविश्वास बढ़ रहा है बल्कि पूरे गांव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। यह योजना महिलाओं के लिए नई उम्मीद और नए अवसर लेकर आई है।