देश में तेजी से फैल रही तुरंत सामान पहुंचाने की व्यवस्था पर अचानक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। नए साल से ठीक पहले देशभर में लाखों डिलीवरी करने वाले श्रमिकों ने काम रोक दिया। खाने पीने का सामान और रोजमर्रा की जरूरतें पहुंचाने वाली सेवाएं प्रभावित हुईं। इस हड़ताल ने उस मॉडल पर सीधा प्रहार किया है जो दस मिनट में सामान पहुंचाने का दावा करता है। अब बहस सिर्फ मजदूरी की नहीं बल्कि इस पूरी व्यवस्था के भविष्य की हो गई है।
दस मिनट की रफ्तार पर क्यों उठे सवाल
श्रमिक संगठनों का कहना है कि इतनी कम समय सीमा का दबाव जान जोखिम में डालता है। देरी होने पर रेटिंग गिरती है जुर्माना लगता है और अधिकारियों का दबाव बढ़ता है। नतीजा यह होता है कि डिलीवरी करने वाले संकरी सड़कों और खराब हालात में तेज वाहन चलाने को मजबूर होते हैं। इसी वजह से संगठन दस मिनट डिलीवरी को ही खत्म करने की मांग कर रहे हैं।
महामारी से शुरू हुई आदत
तेज डिलीवरी की यह आदत उस दौर में बनी जब लोग घरों में बंद थे। आधे घंटे से कम समय में सामान पाने की चाहत बढ़ती चली गई। भारत में कंपनियों ने इसी मांग को देखते हुए और तेजी दिखाई। तकिए से लेकर दवाइयों और खाने तक सब कुछ तुरंत पहुंचाने की व्यवस्था बनाई गई। कई विदेशी बाजारों में यह मॉडल टिक नहीं पाया लेकिन भारत में यह लगातार फैलता गया।
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डार्क स्टोर पर बड़ा दांव
इस व्यवस्था की रीढ़ बने छोटे गोदाम जिनसे ऑर्डर तुरंत पूरे किए जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार आने वाले वर्षों में ऐसे गोदामों की संख्या कई गुना बढ़ सकती है। बड़े खुदरा कारोबारी और ऑनलाइन कंपनियां भी इसमें भारी निवेश कर रही हैं। छोटे शहरों तक दस मिनट डिलीवरी की चाहत पहुंच चुकी है। लेकिन बढ़ते खर्च और जोखिम ने अब इस मॉडल की नींव हिला दी है।
शेयर बाजार में भी असर
श्रमिकों की बेहतर सुरक्षा और सुविधाओं की मांग पहले से निवेशकों को चिंता में डाल रही थी। अब अचानक हुई हड़ताल ने हालात और मुश्किल कर दिए हैं। बाजार में इन कंपनियों से जुड़े शेयरों में गिरावट देखने को मिली है। यदि नियम सख्त हुए और ग्राहकों को थोड़ा इंतजार करना पड़ा तो मुनाफा कमाने से पहले ही यह मॉडल लड़खड़ा सकता है।
क्या बदलेगा पूरा सिस्टम
कंपनियों का कहना है कि वे बीमा और भुगतान जैसी सुविधाएं दे रही हैं। लेकिन सच यह भी है कि लगातार नए श्रमिक जुड़ते और पुराने छोड़ते रहते हैं। देश में काम की तलाश में बड़ी संख्या होने से यह चक्र चलता रहता है। सवाल यही है कि क्या दस मिनट डिलीवरी जारी रह पाएगी या फिर उपभोक्ताओं को थोड़ा धैर्य रखना सीखना होगा। आने वाले समय में इस तेज रफ्तार कारोबार की दिशा तय होगी।