UPI Digital Payments : भारत में लोगों के पैसे निकालने और भुगतान करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। कभी हर बाजार और मोहल्ले में नजर आने वाले एटीएम अब धीरे-धीरे कम हो रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह डिजिटल भुगतान और यूपीआई का बढ़ता इस्तेमाल माना जा रहा है। आरबीआई के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2024 में देश में एटीएम और कैश रिसाइकलर मशीनों की संख्या 2,18,815 थी, जो मार्च 2026 में घटकर 2,09,331 रह गई। जुलाई 2026 में यह संख्या थोड़ी बढ़कर 2,09,812 हुई, लेकिन फिर भी दो साल पहले के मुकाबले करीब 9 हजार कम है।
अब जेब में कैश रखने की जरूरत कम
पहले रोजमर्रा की खरीदारी के लिए लोग एटीएम से पैसे निकालकर रखते थे। सब्जी, किराना या छोटी दुकान पर नकद देना आम बात थी। अब छोटी से छोटी दुकान पर भी यूपीआई का क्यूआर कोड मिल जाता है। मोबाइल से कुछ सेकंड में भुगतान हो जाता है, इसलिए लोगों को बार-बार एटीएम जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
एटीएम से निकलने वाली रकम में भी कमी
सिर्फ एटीएम की संख्या ही नहीं घट रही, बल्कि इनके इस्तेमाल में भी कमी आई है। मार्च 2024 में एटीएम और कैश रिसाइकलर से करीब 2.77 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन हुए थे। जुलाई 2026 में यह आंकड़ा घटकर करीब 2.20 लाख करोड़ रुपये रह गया। यानी दो साल से कुछ ज्यादा समय में इसमें 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।
यूपीआई ने बनाया नया रिकॉर्ड
दूसरी तरफ यूपीआई लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। जुलाई 2026 में यूपीआई पर 2,366 करोड़ लेनदेन हुए, जिनकी कुल रकम करीब 29.88 लाख करोड़ रुपये रही। सरकार के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई ने 24,162 करोड़ सालाना लेनदेन दर्ज किए।
बैंकों की रणनीति भी बदल रही
जब लोग एटीएम से कम पैसे निकाल रहे हैं तो बैंकों के लिए हर जगह नई मशीन लगाना पहले जितना जरूरी नहीं रह गया है। रिपोर्ट के अनुसार ऑफ-साइट एटीएम की संख्या में कमी आई है, जबकि बैंक शाखाओं के अंदर मौजूद एटीएम और कैश रिसाइकलर पर ज्यादा जोर दिख रहा है।
इसे भी पढ़ें : नोएडा की 800 कंपनियों पर ईपीएफओ की नजर, 31 अक्टूबर तक पीएफ नहीं तो हो सकती है कार्रवाई
क्या पूरी तरह खत्म हो जाएगा कैश?
फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। ग्रामीण और छोटे शहरों में नकद भुगतान की जरूरत अभी भी बनी हुई है। बुजुर्गों, छोटे कारोबारियों और ऐसे लोगों के लिए भी नकद जरूरी है जो डिजिटल भुगतान का कम इस्तेमाल करते हैं। इसलिए एटीएम की संख्या घटने के बावजूद कैश पूरी तरह खत्म होने वाला नहीं है। फिलहाल तस्वीर यही है कि भारत में नकद की जगह डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ रहा है और यूपीआई इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आया है।