Magistrate Alankar Agnihotri: बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के बाद यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। उनके समर्थन में ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती सामने आए हैं। उन्होंने इसे व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि आहत समाज की आवाज बताया। शंकराचार्य ने कहा कि यह इस्तीफा किसी खुशी में नहीं, बल्कि गहरे दुख और पीड़ा के साथ दिया गया कदम है, जो वर्तमान हालात पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आहत मन से लिया गया फैसला
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अलंकार अग्निहोत्री का मन उसी तरह आहत है, जैसे आज करोड़ों सनातन धर्म मानने वालों का है। उन्होंने कहा कि जब धर्म, संतों और उनके शिष्यों के साथ अमानवीय व्यवहार होता है, तो इसका असर पूरे समाज पर पड़ता है। एक जिम्मेदार अधिकारी का पद छोड़ना यह दर्शाता है कि मामला कितना गंभीर है।
सम्मान और धर्म के लिए त्याग
शंकराचार्य ने कहा कि प्रशासनिक पद पाने के लिए लोग वर्षों की मेहनत करते हैं, लेकिन अलंकार अग्निहोत्री ने सम्मान और आस्था को प्राथमिकता देते हुए पद त्याग दिया। उनके अनुसार, यह कदम बताता है कि आज भी व्यवस्था के भीतर ऐसे लोग हैं, जो धर्म और आत्मसम्मान के लिए बड़ा निर्णय लेने का साहस रखते हैं।
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UGC कानून पर तीखी आपत्ति
उन्होंने UGC से जुड़े नए कानून को हिंदू समाज में विभाजन पैदा करने वाला बताया। शंकराचार्य का कहना है कि यह नियम एक ही समाज के लोगों को जाति के आधार पर आमने-सामने खड़ा कर सकता है। उन्होंने मांग की कि इस कानून को तत्काल रद्द किया जाए, ताकि सामाजिक एकता बनी रहे।
धर्म और संस्कृति पर संकट का संकेत
संगम स्नान और शंकराचार्यों के सम्मान के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार को चेताया। उनका कहना था कि केवल औपचारिक निमंत्रण पर्याप्त नहीं, बल्कि ठोस व्यवस्था और सम्मान जरूरी है। शंकराचार्य ने कहा कि यदि धर्म और संस्कृति के प्रतीकों का लगातार अपमान हुआ, तो इससे सामाजिक और राजनीतिक असंतोष और गहराएगा।