समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान को गुरुवार को उस मामले में राहत मिल गई, जिसने पिछले कई सालों से उनकी राजनीति और छवि पर सवाल खड़े कर रखे थे. 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान सेना के जवानों पर कथित टिप्पणी को लेकर दर्ज किए गए मुकदमे में एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट, रामपुर ने उन्हें पूरी तरह बरी कर दिया. भाजपा नेता आकाश सक्सेना की शिकायत पर दर्ज यह केस लंबे वक्त तक अदालत में चला और अंत में कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाया. फैसले के बाद उनके समर्थकों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई और इसे न्याय की जीत बताया जा रहा है.
बरी हुए, पर जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे
हालांकि सेना टिप्पणी केस में राहत मिलने का मतलब यह नहीं है कि आज़म खान तुरंत जेल से बाहर आ जाएंगे. वे इस समय दो पैन कार्ड मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद रामपुर जेल में सजा काट रहे हैं. इसी मामले में उनका बेटा अब्दुल्ला आज़म भी जेल में है. इसलिए यह फैसला उनके लिए नैतिक और राजनीतिक राहत तो जरूर है, लेकिन कानूनी रूप से अभी उनकी रिहाई का रास्ता साफ नहीं माना जा सकता. आज़म खान को जेल से बाहर आने के लिए बाकी मामलों में भी कोर्ट से राहत मिलना जरूरी है.
कोर्ट परिसर में सुरक्षा
फैसले से पहले ही कोर्ट परिसर में भारी सुरक्षा की व्यवस्था कर दी गई थी, क्योंकि मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा था. पुलिस बल तैनात था और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी. दोपहर में जैसे ही अदालत ने आज़म खान को निर्दोष करार दिया, सपा कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला. बाहर खड़े समर्थकों ने इसे साजिशों पर न्याय की जीत बताया और कहा कि यह साबित हो गया है कि आज़म खान के खिलाफ कई मामले राजनीतिक प्रेरणा से दर्ज किए गए थे. हालांकि पुलिस और प्रशासन ने शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखा.
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राजनीतिक संदेश और आगे का रास्ता
यह फैसला आज़म खान के राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. वर्षों से कानूनी लड़ाइयों और जेल में रहने के कारण वे सक्रिय राजनीति से दूर थे. ऐसे में इस केस में बरी होना उनके लिए और उनकी पार्टी के लिए मनोबल बढ़ाने वाला कदम है. लेकिन राजनीतिक वापसी का रास्ता तभी साफ होगा जब वे अन्य लंबित मामलों में भी राहत हासिल कर लेंगे. फिलहाल इस फैसले ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि आज़म खान की कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई, लेकिन उनके पक्ष में हवा चलने लगी है. अब आने वाले दिनों में देखना यह होगा कि क्या वे बाकी मामलों में भी राहत पाते हैं और क्या जल्द ही जेल से बाहर आकर सक्रिय राजनीति में वापसी कर पाते हैं.