Azam Khan gets relief: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान को लगभग आठ साल पुराने एक मामले में बड़ी राहत मिली है। 2017 में चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए एक बयान को लेकर उन पर सेना का मनोबल गिराने का आरोप लगाया गया था। इस मामले में बीजेपी विधायक आकाश सक्सेना ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। लंबे समय से चल रही सुनवाई के बाद रामपुर कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। आजम खान की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराई गई।
आरोप साबित नहीं हुए
अदालत के अनुसार, आईपीसी की धारा 153A और 505 के तहत दर्ज किए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिले। गवाहों और उपलब्ध दस्तावेज़ों की जांच के बाद कोर्ट ने माना कि बयान से संबंधित ठोस साक्ष्य अदालत में पेश नहीं किए जा सके। यह मामला 30 जून 2017 को दर्ज हुआ था और तब से लगातार चलती सुनवाई के बाद आजम खान को आरोपों से बरी कर दिया गया। इस दौरान कई बार सुनवाई लंबी खिंची और अंततः कोर्ट ने पाया कि आपराधिक इरादे का कोई प्रमाण नहीं है।
अन्य मामलों में भी चल रही कार्रवाई
हालांकि इस केस में राहत मिलने के बावजूद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम फिलहाल जेल में हैं। 17 नवंबर को फर्जी पैन कार्ड मामले में दोनों को सात–सात साल की सज़ा सुनाई गई थी, जिसके चलते वे न्यायिक हिरासत में हैं। आजम खान पर कुल 100 से अधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से कई में वे पहले ही बरी हो चुके हैं। इस फैसले को उनके राजनीतिक भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।