
उत्तर प्रदेश की राजनीति में कभी आज़म खान का नाम की तूती बोला करती थी. आजम खान की ताक़त और प्रभाव इतना रौबदार था कि हर कोई उनके आगे घुटने टेक देता था. इसी ताकत और दबदबे के साथ आजम की तेज़ तर्रार बयानबाज़ी, मंच से गरजती हुई आवाज़ और सियासी पकड़ ने उन्हें समाजवादी पार्टी का सबसे मज़बूत चेहरा बनाकर सामने ला खड़ा किया था. लेकिन साल 2017 के बाद से हालात कुछ ऐसे बदले कि आज 2025 में वही आज़म खान अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने की जद्दोजहद करते नजर आ रहे हैं.
साल 2017 में योगी सरकार आते ही बढ़ी आजम की मुश्किलें
एक समय सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के भरोसेमंद सहयोगी रहने वाले आज़म खान को हमेशा अल्पसंख्यक राजनीति का बड़ा चेहरा माना गया. मुलायम और अखिलेश सरकार में उन्होंने अहम मंत्रालयों की कमान भी संभाली. साल 2012 में अखिलेश यादव की सरकार में उनके पास आठ विभाग मौजूद थे लेकिन साल 2017 में योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के बाद आजम की किस्मत ऐसी पलटी की मानो मुसीबतों ने उनके घर का ही रास्ता पकड़ लिया हो. इसके बाद आजम की मुश्किलें बढ़ती हीं चली गईं. उनके खिलाफ ज़मीन कब्ज़ाने से लेकर आपराधिक साजिश और हेट स्पीच जैसे मामले दर्ज हो गए. वहीं साल 2022 में हेट स्पीच मामले में सजा मिलने के बाद आजम को विधानसभा की सदस्यता से भी हाथ धोना पड़ा.
“40-45 साल की सियासत में लखनऊ में घर तक ना बना सका”
फिलहाल 23 महीने बाद सीतापुर जेल से बाहर आने के बाद आज़म खान लगातार इंटरव्यू दे रहे हैं. इन इंटरव्यू के दौरान आजम कभी तो आक्रामक दिखाई देते हैं तो कभी भावुक होकर रोने लग जाते है. उन्होंने कहा कि “40-45 साल की सियासत में लखनऊ में रहने के लिए घर तक नहीं बना सका. जेल से बाहर आने के बाद गेस्ट हाउस मांगा, लेकिन वहां भी ठिकाना नहीं मिला”. इसके आगे वह कहते हैं कि “हम चोर हैं, हम डकैत हैं...दिल पत्थर हो गया है.” उनकी यह बातें देखकर हर कोई हैरान रह गया है, क्योंकि ये वही नेता हैं जिनकी ज़ुबान और तीखे-तेज तर्रार शब्द कभी सियासत की गूंज मानी जाती थी.
रामपुर में आजम की पकड़ अब कमजोर दिख रही
बता दें कि आजम खान 10 बार रामपुर से विधायक रह चुके हैं. जिसके चलते आज़म खान की पकड़ पश्चिमी यूपी के मुस्लिम वोटरों पर हमेशा मज़बूत रही है लेकिन जेल जाने के बाद से उनका आधार खिसकता नजर आ रहा है. साल 2022 की बात करें तो तब विधानसभा चुनाव के दौरान वह जेल में रहते हुए भी जीत हासिल कर सके और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म भी सफल हो गए लेकिन इसके बाद रामपुर और स्वार उपचुनाव में बीजेपी और अपना दल ने जीत दर्ज की. बीजेपी और अपना दल की इस जीत ने आज़म की राजनीतिक विरासत पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.
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क्या फिर से आजम का सियासी जलवा होगा कायम?
राजनीतिक जानकारों की मानें तो आज़म खान सहानुभूति का माहौल बनाकर फिर से सक्रिय होना चाहते हैं. उनका संदेश साफ है कि वह अभी राजनीति से बाहर नहीं हुए हैं. हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजे ये भी बताते हैं कि उनके जेल में रहने से सपा को नुकसान नहीं बल्कि फायदा ही हुआ. यही कारण है कि अब सामने बड़ा सवाल यह है कि क्या आज़म खान अपने पुराने जलवे को वापस ला पाएंगे या फिर उनका सियासी सफर ढलान की ओर बढ़ चुका है.